महाराष्ट्र में कुछ चीनी मिलों ने बिना लाइसेंस के पेराई सत्र शुरू किया: मीडिया रिपोर्ट

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पुणे : चीनी आयुक्त कार्यालय ने महाराष्ट्र में 13 चीनी मिलों की पहचान की है, जिन्होंने बिना पेराई लाइसेंस के संचालन शुरू कर दिया है।

द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के मुताबिक, चीनी आयुक्त कार्यालय द्वारा इन मिलों के शीर्ष प्रबंधन को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।राज्य में चीनी मिलों को पेराई लाइसेंस के लिए आवेदन करना होता है और सरकार द्वारा तय की गई तारीख पर या उसके बाद काम शुरू करना होता है। बिना लाइसेंस के पेराई शुरू करने वाली मिलों पर 500 रुपये प्रति टन गन्ना पेराई के जुर्माने सहित कार्रवाई की जाती है। इस सीजन की शुरुआत में चीनी आयुक्त कार्यालय ने दोषी मिलों के प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का फैसला किया है।

चीनी आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि, उनके संज्ञान में 13 मिलें आई हैं, जिनमें से अधिकांश पुणे जिले में हैं, जबकि कुछ अन्य सोलापुर, सांगली और सातारा में हैं। इन मिलों को लाइसेंस जारी नहीं किया गया है, फिर भी उन्होंने पेराई सत्र शुरू कर दिया है। इस सीजन में चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड़ ने पेराई लाइसेंस जारी करने की पूर्व शर्त के रूप में उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का शत-प्रतिशत भुगतान करने के निर्देश दिए थे।

महाराष्ट्र में पेराई सीजन ने रफ्तार पकड़ ली है। चीनी आयुक्तालय के आकड़ों के मुताबिक, 14 नवंबर, 2021 तक राज्य में कुल मिलाकर 131 चीनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी है। जिसमे 62 सहकारी एवं 69 निजी चीनी मिलें शामिल है, और 97.71 लाख टन गन्ने की पेराई की जा चुकी है। राज्य में अब तक 83.61 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया गया है। राज्य में फ़िलहाल औसत चीनी रिकवरी 8.56 प्रतिशत है।

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