सोमेश्वर चीनी मिल के अध्यक्ष्य किसानों को कर रहे गुमराह : सतीश काकड़े का आरोप

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चीनी नियंत्रण अधिनियम, 1966 के अनुसार, गन्ना कटाई के 14 दिनों के भीतर किसानों को एफआरपी राशि का भुगतान करना अनिवार्य है; हालांकि, सोमेश्वर चीनी मिल के अध्यक्ष ने सरकार से सभी गन्ना उत्पादकों के अधिकारों नकारते हुए तीन किस्तों में एफआरपी लाने की अनुमति देने की मांग की है ।

पुणे : चीनी मंडी

चीनी नियंत्रण अधिनियम 1966 के अनुसार, गन्ना कटाई के बाद 14 दिनों के भीतर एफआरपी राशि का भुगतान करना अनिवार्य है; हालांकि, किसान कृति कमेटी के जिला अध्यक्ष सतीश काकड़े ने आरोप लगाया है कि, सोमेश्वर चीनी मिल के अध्यक्ष ने सरकार को तीन किस्तों में एफआरपी देने को कहा है।

काकड़े द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, 14 दिनों के भीतर गन्ने का भुगतान न करने के प्रावधान के रूप में 15 प्रतिशत का जुर्माना लगाया जाता है। इस तरह, गन्ना किसानों को कानून से सुरक्षा मिली। सोमेश्वर पुणे जिले में एकमात्र सहकारी चीनी मिल है, जो एकमुश्त एफआरपी की पेशकश कर सकता है। लेकिन वर्तमान अध्यक्ष केवल सरकारी मदद पाने के लिए काम कर रहे हैं। अखबारों में एकमुश्त एफआरपी न देने का कारण बताते हुए, अध्यक्ष केवल धन का एक पक्ष देकर सदस्यों को गुमराह कर रहे है ।

अखबार से बात करते हुए, अध्यक्ष कहते हैं की, उधार की लागत, ब्याज, उत्पादन व्यय, व्यापारिक व्यवहार, वेतन, प्रति टन 500 रुपये तक की लागत। इसलिए, ऐसा लगता है जैसे कि 2773 रुपये के एकमुश्त एफआरपी का भुगतान करने की समस्या है। मिल की वार्षिक आम बैठक में, 20 करोड़ उतार-चढ़ाव धन को मंजूरी लेकर एकमुश्त एफआरपी देने का वादा करनेवाले अब अपने वादे से क्यूँ मुकर रहे है? यह सवाल काकड़े ने पूछा है।

SOURCEChiniMandi

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