जल्द ही लागू होगी नई चीनी निर्यात नीति

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नई दिल्‍ली : चीनीमंडी

केंद्र सरकार 2019-2020 चीनी सीझन के लिए जल्द ही नई चीनी निर्यात नीति की घोषणा कर सकती है। चीनी मीलों को सरकार के इस फैसले को आगे बढाने के लिए तैयार रहने का आवाहन राष्ट्रीय सहकारी चीनी मील महासंघ के अध्यक्ष दिलीप वलसे पाटिल ने किया है। महासंघ की हाल ही में नई दिल्‍ली में बैठक हुई, इस बैठक में सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा हुई।

वलसे पाटिल ने कहा की, 2018-2019 चीनी सीझन खत्म होने की कगार पर है और देश में चीनी का 330 लाख मिट्रीक टन रिकॉर्ड उत्पादन संभावित है। अधिशेष चीनी, निर्यात स्थिती और घरेलू बाजार में चीनी की खपत को देखते हुए अगला सीझन 145 लाख मिट्रीक टन रिकॉर्ड अधिशेष चीनी के साथ शुरू होने की संभावना अभी से दिख रही है। अधिशेष की समस्या से छुटकारा पाने के लिए कम से कम 70 से 80 लाख टन चीनी की निर्यात अनिवार्य है। उन्होंने कहा की, हमने यह बात केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के सामने रखी थी जिसके कारण खाद्य मंत्रालय के सहसचिव (चीनी) के नेतृत्व में इस बैठक का आयोजन किया गया था।

अधिशेष चीनी की समस्या को ध्यान में रखते हुए 2019-2020 के लिए चीनी निर्यात नीति तय की जाएगी। जिसके तहत हर एक राज्य और चीनी मील को निर्यात कोटा आवंटित किया जाएगा, घरेलू बाजारों में चीनी के दाम और निर्यात दाम में जो फासला होगा, उसे खत्म करणे के लिए सब्सिडी और शॉर्ट मार्जिन संबंधीत समस्याओं का भी हल निकाला जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा चीनी निर्यात हो सके।

प्रकाश नाईकनवरे ने बताया की, दुनिया का दुसरा सबसे बडा चीनी आयातक देश इंडोनेशिया ने चीनी आयात शुल्क 15 प्रतिशात से 5 प्रतिशत तक कम कर दिया है, जिसका सबसे जादा फायदा भारत को होगा। इंडोनेशिया हर साल तकरीबन 45 लाख टन चीनी का आयात करता है। इसके साथ ही अगले सीझन में थायलंड, ब्राझील, पाकिस्तान और युरपीय समुदाय के देशाेंं मे चीनी का कम उत्पादन होने की संभावना जताई गई है। ऐसे हालात में भारत को चीनी निर्यात के सबसे ज्यादा अवसर मिल सकते है।

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