श्रीलंका अपने चीनी उद्योग को लाभकारी बनाने के लिए लेगा भारत की मदद

191

कोलंबो,19 फरवरी: दक्षिण एशियाई देशों में कृषि और खाद्यान उत्पादन के मामले में भारत ने जो तरक्की हासिल की ही है उसे भारत के सभी पडौसी देश आदर्शमानकर भविष्य में अपने यहां अपनाते रहते है। भारत का पडौसी देश श्रीलंका भी कृषि के क्षेत्र में अग्रणी देश के रूप में जाना जाता है लेकिन बीते कुछ सालों से यहां की चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने से चीनी मिलों के सामने वित्तीय संकट पैदा हो रहा है। चीनी मिलों को चालू रखने के लिए वित्तीय मदद की जरूरत आ रही है। मिलों की आर्थिक तंगी से जुडी समस्या के मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए श्रीलंका के लोकसभा अध्यक्ष कारु जयसूर्या ने अपने सरकारी आवास पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमारे देश में चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति कमजोर हो रही है। गन्ना किसानों का बकाया चुकाना तो दूर कामगारों को वेतन देने के लिए भी मिलों को अपने खर्चों में कटौती करने पड़ रही है। जयसूर्या ने कहा कि गन्ने खेती कम होने से चीनी मिलों में गन्ने की आवक कम हो रही है। जिससे मिलों को आर्थिक नुक़सान हो रहा है। अक्सर सांसदों द्वारा चीनी मिलों द्वारा गन्ना बकाया का मुद्दा संसद में उठाया जा रहा है। सरकार द्वारा मिलों को सस्ती दर का लोन दिया जा रहा है लेकिन ये समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। इस बारे में संसदीय समिति में बार बार ये मुद्दा उठा है। अब हमने तय किया है कि मार्च में होने जा रहे देश के आम चुनावों के बाद एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल भारत जाएगा जो वहां पर चल रही लाभकारी चीनी मिलों का दौरा कर उन मिलों में हो रहे नव प्रयोगों के बारे में सरकार को जानकारी देगी।

लोक सभा अध्यक्ष जयसूर्या ने कहा कि हमें ज्ञात हुआ है कि भारतीय चीनी मिलें अपने यहां चीनी उत्पादन के साथ साथ गन्ना अवशेष से इथेनॉल, बायोगैस और कंपोष्ट खाद बनाने का काम कर रही है इससे चीनी मिलों के लिए आय के अतिरिक्त श्रोतों का निर्माण हो रहा है। इससे मिलों को जहां किसी एक काम में नुकसान हो रहा है तो दूसरे में लाभ भी हो रहा है। भारतीय मिलों को गन्ने के हर अवशेष से वित्तीय लाभ हो रहा है, वहीं अतिरिक्त आमदनी होने से मिलों को किसानों का समय पर बकाया चुकाने में भी मदद मिल रही है।

चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति और सरकार की पहल पर बात करते हु्ए श्रीलंका के चीनी उ्दमयी चंद्रसेना नायके ने कहा कि गन्ने की खेती की तरफ लोगों का रुझान कम हो रहा है। मंहगे होते खाद व उर्वरकों के अलावा खेती में जोखिम बढता जा रहा है। ऐसे में खेती को लाभकारी बनाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय है। अगर सरकार चीनी मिलों के कायाकल्प के लिए श्रीलंका से भारत में कोई प्रतिनिधिमंडल भेजने का काम कर रही है तो उसमें गन्ना किसान और चीनी मिलों के प्रतिनिधियों को भी सांसदों के साथ भेजा जाना चाहिए ताकि समस्या का वास्तविक समाधान हो और सदियों से चले आ रहे देश के चीनी उद्योग को लाभकारी बनाकर फिर पुर्नजीवित किया जा सके।

यह न्यूज़ सुनने के लिए प्ले बटन को दबाये.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here