चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए श्रीलंकाई सरकार ने उठाया कदम

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कोलंबो, 25 फ़रवरी: श्रीलंका सरकार देश के गन्ना किसानों को सशक्त बनाने के साथ घाटे में चल रही चीनी मिलों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए काम कर रही है। यहां की अधिकांश चीनी मिलें गन्ने से गुड या चीनी बनाने के काम में ही लगी रहती है लेकिन इससे मिलों को कुछ फायदा नजर नहीं आ रहा। चीनी मिलों की वित्तीय तंगी की समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने गन्ने से शराब बनाने को प्रौत्साहन देना शुरु किया है। सरकार की इस अनुशंसा से चीनी मिलें भी काफी उत्साहित है। प्रायोगिक तौर पर लंका के सेवानांगला जिले में स्थित चीनी मिल से इसकी शुरुआत की जा रही है। इस मिल में गन्ने से चीनी बनाने के साथ अब शराब भी तैयार की जा रही है। इस जिले में गन्ना काफी तादाद में होता है और पहले से स्थानीय लोग गन्ने से देशी तरीको से शराब बनाने का काम करते आए है। देशी शराब बनाने के काम में लगे इन्ही कामगारों को चीनी मिलों ने अपने यहां दैनिक वेतनभोगी के तौर पर रख लिया है। ये लोग गैर तकनीकी श्रेणी में बतौर वेतनभोगी काम कर रहे है। लेकिन इनका शराब बनाने का अनुभव और तजुर्बा पुराना है जिसे ये अपने पुरखों से सीखते आए है। देशी तरीकों से तैयार शराब को अधिकृत रूप से प्रमाणिकता मिलने से अब इस मिल में तैयार शराब की बाजार में तेजी माँग बढ रही है तो बिक्री में भी इजाफा हुआ है, साथ ही शराब के औसत दाम होने से स्थानीय लोग जो देशी शराब के आदी है वो भी चीनी मिल द्वारा निर्मित शराब ही खरीद रहे है। तय मानकों पर तैयार की गयी यह शराब लोगों को काफी पसन्द आ रही है।

अब चीनी मिल प्रबंधन इसे ब्रांड के रुप में देश के अन्य हिस्सों में इसकी बिक्री बढाने पर ध्यान दे रहा है। सेवानांगला चीनी मिल के मुख्य प्रबंधक चेतैया आरोसा ने कहा कि पहले हमारी मिल काफी अच्छी चलती थी लेकिन बीते कुछ सालों से मिल के खर्चे पूरे नहीं हो रहे थे। कामगारों को वेतन देने में भी दिक़्क़त आ रही थी। लेकिन अब सरकार से शराब बनाने की अनुमति मिलने के बाद हमारी वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है। हमारा लक्ष्य है कि अगले साल तक हम बैंक का लोन और अन्य कर्ज पूरे कर लें। चेतैया ने कहा कि चीनी मिल की वित्तीय स्थिति सुधरने किसानों को भी हम समय पर उनका बकाचा चुका रे है। इसके अलावा पिछले तीन सालों से कामगारों का बोनस बकाया है उसे भी जल्द ही देने का काम करेंगे।

चीनी मिल में काम कर रहे कर्मचारी सैल्वराज ने कहा कि मै 13 साल से यहां काम कर रहा् हूँ लेकिन पिछले तीन सालों से चीनी मिल घाटे में चले जाने से हमें वेतन भी समय पर नहीं मिल रहा था लेकिन अब स्थितियां बदली है। आर्थिक तंगी से हम लोग उबरे है समय पर पैसा मिल रहा है तो काम करने का भी मन करता है।

श्रीलंका सरकार में आर्थिक विभाग के प्रधान निदेशक सैंपुअल समरवीरा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि गांवों के लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिले और उनकी आजीविका सुनिष्चित हो। इस मिल के चलने से ग्रामीण आबादी को जहां रोजगार मिल रहा है। वहीं सदियों से परंपरागत शराब बनाने के काम में जुटे कामगारों को यहां काम मिल रहा है। समरवीरा ने कहा कि सरकार आने वाले दिनों में गन्ने से तैयार इस शराब को ब्रांड बनाने की योजना पर काम करेगी और देश एवं देश के बाहर भी इसकी ब्रिकी को प्रौत्साहन देगी।

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