राज्य सरकार द्वारा को-ऑपरेटिव चीनी मिलों को बैंक गारंटी देने के संकेत

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पुणे: आगामी गन्ना पेराई सत्र से पहले, महाराष्ट्र सरकार ने वित्तीय रूप से कमजोर को-ऑपरेटिव चीनी मिलों को बैंक गारंटी देने के संकेत दिए है। गुरुवार को पुणे में सहकारिता मंत्री बालासाहेब पाटिल की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में उन्होंने मिलों से आग्रह किया कि, वे पूर्व-मौसमी लोन, जिसके लिए सरकार गारंटी देगी, उस लोन को 2020-21 के चीनी सत्र के अंत से पहले चुकाना होगा।

राज्य सरकार ने पहले पांच वित्तीय मापदंडों को लागू करते हुए एक जीआर जारी किया था, जिसके आधार पर मिलों को बैंक गारंटी के विस्तार के लिए मूल्यांकन किया जाना था, क्योंकि मिलें कमजोर बैलेंस शीट के कारण पैसा जुटाने में विफल थी।

चीनी आयुक्त के अधिकारियों द्वारा प्रारंभिक जांच से पता चला था कि योजना के लिए आवेदन करने वाली 33 मिलों में से कोई भी सरकार द्वारा निर्धारित पांच शर्तों को पूरा नहीं कर रही थी। इस योजना के लिए केवल चार मिलों की सिफारिश की गई थी क्योंकि अधिकारियों को लगता था कि सांगली, सतारा और अहमदनगर में मिलों को अपने कैचमेंट एरिया में खड़े गन्ने की समय पर पेराई में समस्या आएगी।

गुरुवार को, पाटिल ने राज्य मंत्री विश्वजीत कदम के साथ संबंधित चीनी मिलों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के साथ कई बैठकों की अध्यक्षता की। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए, पाटिल ने कहा कि, राज्य सरकार समय पर गन्ने की पेराई शुरू करने के लिए प्रयासरत रहेगी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने कहा कि, राज्य सरकार ने चीनी मिलों को सीजन के अंत से पहले प्री-सीजनल लोन चुकाने की शर्त रखी है। प्री-सीजनल लोन का उपयोग मिलों द्वारा मशीनरी मरम्मत, गन्ना कटाई और परिवहन श्रमिकों के लिए किया जाता है। कमजोर बैलेंस शीट के चलते सहकारी मिलों को लोन मिलना मुश्किल हो था।

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