श्रीलंका में चीनी जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू

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कोलम्बो: श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पर इस समय संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कोरोना वायरस महामारी से उबरने के लिए संघर्ष कर रहे श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घटकर बहुत कम रह गया है, जिस वजह से इसे कृषि रसायनों, कारों और अपने मुख्य मसाले हल्दी के आयात में कटौती करनी पड़ी है। अब देश में जमाखोरी के चलते चीनी समेत अन्य खाद्यान्न के दर आसमान को छू रहें है। सरकार ने जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है। चीनी 135 रुपये ($0.68) प्रति किलो के राज्य-अनिवार्य मूल्य पर आसानी से उपलब्ध नहीं हो रही है, लेकिन काला बाजार में दोगुनी कीमत पर खरीदी जा सकती है।

जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे मेजर जनरल सेनारथ निवुन्हेला ने कहा कि, छापे में कम से कम 13,000 टन चीनी मिली। निवुन्हेला ने कहा कि जब्त किए गए स्टॉक को राज्य के स्वामित्व वाले खुदरा स्टोरों को खुले बाजार मूल्य से नीचे बेचने के लिए दिया जाएगा। छापेमारी राजधानी के बाहर गोदामों पर केंद्रित थी।निवुन्हेला को मंगलवार को आवश्यक सेवाओं के आयुक्त के रूप में नामित किया गया है। उन्होंने कहा की, इस छापेमारी का उद्देश्य जमाखोरी को रोकना है।उन्होंने इस बात से इनकार किया कि चीनी जब्त की जा रही है। उन्होंने दावा किया की, सरकार सीमा शुल्क को प्रदान किए गए मूल्यांकन के आधार पर आयातकों को उचित मूल्य का भुगतान करेगी। आयातकों ने चीनी का भंडार किया था, जबकि बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ीं।

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