उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों को गन्ना मूल्य का तत्काल भुगतान करने के कड़े निर्देश

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मा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा त्वरित गन्ना मूल्य भुगतान हेतु दिये गये निर्देशों के क्रम में गन्ना विकास विभाग ने भुगतान के मुद्दे पर कड़ा रूख अपना लिया है। इसी क्रम में कार्यालय गन्ना आयुक्त के सभाकक्ष में प्रदेश की निजी चीनी मिल समूहों एवं एकल इकाईयों के मुख्य वित्त अधिकारी(सी.एफ.ओ.) के साथ चीनी मिलवार गन्ना मूल्य भुगतान की समीक्षा की गयी। समीक्षा बैठक में प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग, श्री संजय आर. भूसरेड्डी द्वारा चीनी मिलों को पेराई सत्र 2021-22 के गन्ना मूल्य का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने हेतु कड़े निर्देश दिये गये।

इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए श्री भूसरेड्डी ने बताया कि जिन चीनी मिलों की बैंकों से सी.सी.एल.(कैश क्रेडिट ऋण) स्वीकृत करायें तथा गन्ना मूल्य भुगतान में तेजी लायें एवं किसानों का समय से गन्ना मूल्य भुगतान करना सुनिश्चित करें। चीनी मिलों को प्राथमिकता के आधार पर किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान करना होगा और कडे़ शब्दों में यह भी बताया कि चीनी मिलें टैगिंग आदेश का अक्षरशः अनुपालन करें, कोई भी मिल चीनी के विक्रय से प्राप्त होने वाली धनराशि का व्यावर्तन करती है तो इसे बरदाश्त नही किया जायेगा अपितु उसके खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही संस्थित की जायेगी।

इसी कड़ी में श्री भूसरेड्डी द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि प्रदेश की 25 मिलां में मृदा परीक्षण लैब स्थापित है, जिसमें स्थापित क्षमता के अनुसार स्वाइल टेस्टिंग न किये जाने पर गन्ना आयुक्त द्वारा अप्रसन्नता व्यक्त की गयी और कडे़ निर्देश दिये गये कि लैब के संचालन हेतु दक्ष कार्मिकों की व्यवस्था कर क्षमता के अनुरूप अपने क्षेत्र के किसानों के मृदा नमूनों का परीक्षण सुनिश्चित करायें तथा फर्टिलिटी मैप बनायें, इसी प्रकार चीनी मिलों में स्थापित टिशू कल्चर के कार्यां में समीक्षा के दौरान पाया गया कि अधिकांश चीनी मिलें टिशू कल्चर पौध तैयार कर कृषकों को वितरित करती हैं। इस संबंध में निर्देश दिये गये कि टिशू कल्चर के पौधे कमजोर होने के कारण मरने की सम्भावना अधिक रहती है तथा गन्ना कमज़ोर होने के कारण उत्पादन भी घटता है, जिससे टिशू कल्चर से उगाये गये गन्ने पर किसानों को एक तो अतिरिक्त लागत वहन करना पड़ेगा साथ ही उसे उत्पादन भी कम मिलेगा। इस संबंध में विस्तृत निर्देश दिये गये कि चीनी मिलें अपने लैब में तैयार पौधों को पहले अपने निजी फार्म पर अधिरोपित कर नर्सरी तैयार करें और इस नर्सरी में तैयार किये गये गन्ने से किसानों को बीज का वितरण सुनिश्चित करें। गन्ने के लाल सड़न रोकथाम के संबंध में निर्देश दिये गये कि चीनी मिलें ट्राईकोडर्मा का अधिक से अधिक उपयोग सुनिश्चित करें और इसे अपने विकास कार्यक्रम का अनिवार्य अंग बनायें।

यह भी उल्लेखनीय है कि गन्ना आयुक्त द्वारा गन्ना मूल्य भुगतान की नियमित समीक्षा की जा रही है तथा विभागीय अधिकारियों को चीनी मिलों पर दबाव बनाकर ससमय गन्ना मूल्य भुगतान में और तेज़ी लाने तथा अनुश्रवण हेतु निर्देशित किया गया है।

 

 

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