अब मजबूत रुपया बना चीनी निर्यात में रोड़ा; महाराष्ट्र की मिलें मुश्किल में…

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मुंबई: चीनी मंडी

सिर्फ एक महीने में, महाराष्ट्र की चीनी मिलों को निर्यात के मामले में आशा से निराशा की ओर धकेल दिया है। रुपया मजबूत हो गया है और अंतरराष्ट्रीय चीनी की कीमतों में अपेक्षित वृद्धि में धीमी गति के कारण वैश्विक बाजारों में चीनी निर्यात करने की चीनी मिलों की योजनाओं को रोक दिया है।

मुंबई के कमोडिटी विश्लेषक आनंद हाडे कहते हैं की, रुपया 74.40 रुपये से 71 रुपये हो गया है और सुधार होने की उम्मीद है, जिससे चीनी निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। सिर्फ एक महीने पहले, शरद पवार के नेतृत्व में महाराष्ट्र के चीनी सहकारी समितियों ने अंतरराष्ट्रीय चीनी बाजारों में प्रवेश करने के लिए विचारों पर चर्चा की थी।

महाराष्ट्र सहकारी समिति के एक अधिकारी ने कहा, चीनी की कीमतें निर्यात के लिए अपेक्षित नहीं हैं। राज्य की चीनी मिलों को लगता था की, ब्राजील के उत्पादन की अपेक्षा कर रही थी, जो दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है उस देश ने इथेनॉल के उत्पादन में वृद्धि की है, तो उसका सीधा फायदा भारत के चीनी उद्योग को होगा।

केंद्र सरकार द्वारा 50 लाख टन चीनी का निर्यात लक्ष्य निर्धारित

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष में 50 लाख टन चीनी का निर्यात लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसमें से अकेले महाराष्ट्र से 15 लाख टन का हिस्सा था । कुछ मिलों ने वैश्विक बाजारों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों की अतिरिक्त श्वेत चीनी का उत्पादन करने के लिए पहले ही निवेश करना शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार भी चीनी उद्योग के हितों के रक्षा के लिए कई सब्सिडी के साथ आई, लेकिन ऑस्ट्रेलिया जैसे चीनी के उत्पादक ने विश्व व्यापार संगठन से भारत की शिकायत कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने दावा किया है की , वैश्विक बाजारों में चीनी को डंप करने का भारत प्रयास कर रहा हैं। महाराष्ट्र चीनी संघ के अधिकारियों के मुताबिक भारत अभी भी कम से कम 44 मिलियन टन चीनी पर बैठा है। 2019 की गर्मियों में 35 मिलियन टन चीनी का उत्पादन होने की उम्मीद है। दूसरी ओर चीनी की घरेलू मांग सालाना 26 मिलियन टन है। भारत अगले साल भी अधिशेष चीनी की समस्या से परेशान हो सकता है ।

SOURCEChiniMandi

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