चीनी संकट… यूपी में बिक्री कोटा में 100% बढ़ोतरी की मांग

योगी सरकार ने बिक्री कोटा, चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत में बढ़ोतरी के लिए केंद्रीय खाद्य मंत्रालय को लिखा खत

लखनऊ : चीनी मंडी

उत्तर प्रदेश में गन्ने के भुगतान के संकट और चीनी अधिशेष के कारण, योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य की चीनी मिलों की मासिक चीनी बिक्री कोटा लगभग 1.1 मिलियन टन से दोगुना करने की मांग की है। यूपी के गन्ना आयुक्त संजय भूसरेड्डी ने केंद्रीय खाद्य सचिव को लिखा है कि, किसानों को त्वरित भुगतान की सुविधा प्रदान करने और इन्वेंट्री बिल्ड को आसान बनाने के लिए चीनी बिक्री का कोटा और 1.133 मीट्रिक टन बढ़ाया जाए।

उन्होंने कहा कि, राज्य की मिलों के पास पिछले पेराई सत्र 2017-18 से संबंधित 2.6 मीट्रिक टन से अधिक का चीनी अधिशेष स्टॉक था, जब यूपी ने 12 लाख मीट्रिक टन से अधिक का उत्पादन किया था। मौजूदा सीजन के दौरान, पहले से ही, राज्य मिलों को अगले साल तक लगभग 12.5 मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन करने की उम्मीद है, जिसमें से निर्यात कोटा 1.75 मीट्रिक टन अनुमानित है। नतीजतन, ताजा उत्पादन और अधिशेष स्टॉक जोड़ने और निर्यात कोटा घटाने के बाद यूपी मिलों के साथ चीनी की शुद्ध उपलब्धता लगभग 13.6 मीट्रिक टन होने की उम्मीद है। भूसरेड्डी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि, दिसंबर 2018 और नवंबर 2017 के बीच 12 महीनों को ध्यान में रखते हुए, राज्य को 1.133 मीट्रिक टन की मासिक चीनी बिक्री कोटा की आवश्यकता होगी।

जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्टूबर और नवंबर 2018 में, प्रभावी मासिक बिक्री कोटा केवल 625,000 टन; 540,000 टन; 611,000 टन; 683,000 टन; 806,000 टन; और 767,000 टन था, जो क्रमशः, वास्तविक आवश्यकता से काफी नीचे था । राज्य ने चीनी की एक्स गेट न्यूनतम बिक्री की कीमत भी 2900 रुपये प्रति क्विंटल से 3250 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर से तक बढ़ाने की मांग की है, यह दावा करते हुए कि कानपुर स्थित राष्ट्रीय चीनी संस्थान (एनएसआई) ने यूपी मिलों की औसत चीनी उत्पादन लागत की गणना 3400 रूपये क्विंटल की थी ।

भूसरेड्डी ने दावा किया कि, थोक उपभोक्ताओं ने चीनी की खपत का 65% हिस्सा लिया है और न्यूनतम बिक्री की कीमत में इस तरह की वृद्धि से वास्तविक उपभोक्ताओं को अधिक प्रभावित नहीं होगा, लेकिन यह निश्चित रूप से किसानों को शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करेगा, चीनी उद्योग के वित्तीय स्वास्थ्य को बनाए रखेगा और संबद्ध उद्योगों को बढ़ावा भी देगा। इस बीच, भूसरेड्डी ने 7 निजी चीनी मिलों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसीए) की धारा- 3/7 के तहत पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दाखिल करने का आदेश दिया है। जिनमे मलकपुर, वाल्टरगंज, बिसौली, बृजनाथपुर, गगलहरी, बुलंदशहर और गदौरा चीनी मिलें शामिल है । इससे पहले, चीनी मिलों के खिलाफ पहले से ही एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें मलकपुर और मोदीनगर (मोदी समूह) और बृजनाथपुर और सिम्भावली (सिम्भावली समूह) शामिल हैं, जिसमें गन्ना बकाया प्रमुख वजह थी ।

इसके अलावा, मलकपुर, वाल्टरगंज, मोदीनगर, बिसौली, बृजनाथपुर, गागलहेड़ी, बुलंदशहर, चिल्हिया और गदौरा जैसे सबसे अधिक गन्ना बकाया वाले 9 चीनी मिलों के खिलाफ वसूली प्रमाण पत्र (आरसी) जारी किए गए हैं। ये मिलें बजाज हिंदुस्तान, सिम्भावली, वेव और मोदी ग्रुप की हैं। आरसी संबंधित जिला मजिस्ट्रेट को नीलामी के माध्यम से बकाया राशि वसूलने के लिए इन चीनी मिलों की चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार देता है। वर्तमान में, 2017-18 के पेराई सत्र के दौरान 119 चीनी मिलों को बेची गई कुल 354 अरब रुपये की गन्ना की निजी मिलरों पर 22 अरब रुपये से अधिक बकाया है। इस बीच, यूपी मिलों ने चालू 2018-19 सत्र के दौरान लगभग 2 मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन किया है।

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