गन्ना बकाया मुद्दा भाजपा के लिए नुकसानदायक?

राजकीय जानकारों का मानना है की, लोकसभा चुनाव में प्रदेश में जाटों और महागठबंधन का अलग होना पार्टी के लिए दोहरी मार हो सकती है।

लखनऊ : चीनी मंडी

जाट बहुल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ते गन्ने का बकाया भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव में मुसीबत खड़ा कर सकता है। राजकीय गलियारों में अभी से गन्ना बकाया मुद्दा उछाला जा रहा है, और विपक्षी इसे योगी सरकार की नाकामयाबी बता रहा है। 2014 के लोकसभा और 2017 के राज्य विधानसभा चुनावों में जाट किसान समुदाय के वोट को मजबूत करने और मुस्लिम मतदाताओं में विभाजन ने भाजपा को सत्ताधारी बनाया था। लेकिन गन्ने का बकाया भुगतान नहीं होने से, जो 12 मार्च तक 11,845.01 करोड़ था, जिसके चलते किसानों को चीनी मिलों को बंद करने और आंदोलन के लिए मजबूर किया। यह आंदोलन मुख्य रूप से जाटों द्वारा आयोजित किया गया, इसके नेता पिछले चुनाव में खुले तौर पर भाजपा के साथ खड़े थे।

पहले चरण में, पश्चिमी यूपी की आठ सीटों पर मतदान
पहले चरण में, पश्चिमी यूपी की आठ सीटों पर 11 अप्रैल को मतदान होगा। इनमें मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, कैराना, बिजनौर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर शामिल हैं। इन सभी सीटों को भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रभावशाली मार्जिन के साथ जीता था, और आंकड़े बताते हैं कि महागठबंधन – यहां तक कि अपने संयुक्त वोट शेयर के साथ – पिछले आम चुनावों में भाजपा के पक्ष में डाले गए वोटों की कुल संख्या को पार करने में विफल रहा। मिसाल के तौर पर, मुजफ्फरनगर में, भाजपा के संजीव बाल्यान को 6,53,391 लाख वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वियों – 1,60,810 वोटों के साथ सपा, 2,52,241 वोटों के साथ बसपा और 12,937 वोटों के साथ कांग्रेस – इन तीनो ने मिलकर भी जीत का अंतर पार नहीं किया।

हालांकि, दो कारक इस चुनाव को पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों से अलग करते हैं। एक यह है कि पिछले दो वर्षों में गन्ने के भुगतान में राज्य सरकार की अक्षमता और राज्य के सलाहकार मूल्य (एसएपी) को बढ़ाने में विफलता के कारण जाटों ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दूसरा, सपा, बसपा और रालोद का एक साथ आना मुस्लिम वोटों को मजबूत करता है, जो इन आठ सीटों में से प्रत्येक में महत्वपूर्ण है, पिछले चुनाव में सभी विपक्ष बिखरे हुए थे, उनमें से प्रत्येक ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा था।

जाति का ‘गणित’…
उदाहरण के लिए, कैराना में, कुल 15.5 लाख मतदाताओं (लगभग) में, लगभग 5.26 लाख मुस्लिम, 3 लाख दलित, 1.40 लाख जाट, 1.25 लाख गुर्जर, 1.32 लाख कश्यप, 1.35 लाख सैनिक, 65,000 ब्राह्मण, 60,000 वैश्य और लगभग 32,000 ठाकुर हैं। मुसलमानों, दलितों (जिनमें से अधिकांश जाटव हैं) और जाटों के एकीकरण के साथ, महागठबंधन की स्थिति मजबूत हो गई और जाट किसानों को लगता है कि यही स्थिती से हार-जीत निर्धारित होती है।

एसएपी में एक पैसा नहीं बढ़ाया
किसान संघर्ष समिति के एक नेता ने कहा की, हम सभी ने पिछली बार भाजपा को वोट दिया था। मैं भाजपा किसान मोर्चा का जिला अध्यक्ष था। हम सभी ने मोदीजी का समर्थन किया। लेकिन पिछले दो वर्षों में, उन्होंने एसएपी में एक पैसा नहीं बढ़ाया है। एक किसान एक क्विंटल गन्ने उगाने में 297 रूपये खर्च करता है और एसएपी 325 रूपये है। अगर भाजपा स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने के बारे में ईमानदार थी, तो उन्हें हमें कम से कम 450 रूपये प्रति क्विंटल देना चाहिए। लेकिन हमें वह भी नहीं मिल रहा है जो हमसे वादा किया गया है। एक अन्य किसान के अनुसार, भाजपा बालाकोट हवाई हमले के बाद किसानों को जाति और सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने और उन पर एक सैन्य आख्यान थोपने की कोशिश कर रही है।

‘कैराना’ की झलक फिर एक बार दिखेगी….
एक किसान ने कहा की, वे सोचते हैं कि हम सभी मूर्ख हैं। उन्हें पिछली बार हमारा समर्थन मिला और देखो उन्होंने हमारे साथ क्या किया। हम अपने बच्चों की फीस का भुगतान करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कैराना से लोकसभा उपचुनाव में रालोद के टिकट पर तबस्सुम हसन की जीत का हवाला देते हुए इन हिस्सों में मतदाताओं की मनोदशा का उदाहरण दिया। तबस्सुम इस बार सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं और भाजपा की ओर से पूर्व सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को मैदान में उतारने की संभावना है। स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं का मानना है कि, पाकिस्तान पर हवाई हमलों के बाद “राष्ट्रवादी” मूड ने अन्य सभी मुद्दों को दरकिनार कर दिया है।

…इससे भाजपा का “कायाकल्प”
आरएसएस के एक स्थानीय कार्यकर्ता ने, सरधना निर्वाचन क्षेत्र के विधायक, संगीत सोम को 17 मार्च को शामली में बालाकोट हमलों पर बोलने के लिए आमंत्रित किया था। सोम को स्थानीय लोगों के हवाले से कहा गया है कि, भारतीय वायु सेना लाहौर में राष्ट्रीय ध्वज को फहराने से बस कुछ ही मिनट दूर थी। संगल के अनुसार, इस कथा ने पश्चिमी यूपी में भाजपा का “कायाकल्प” किया गया है। केवल जाट गन्ने पर विरोध कर रहे हैं। यह कोई मुद्दा नहीं है। मोदीजी के दोबारा चुने जाने पर लोग उत्साहित हैं।

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