चीनी उद्योग और गन्ना किसानों की बजट पर नजर, आर्थिक मदद की उम्मीद

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नई दिल्ली: आगामी आम बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा; और चीनी उद्योग को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अपेक्षाएं हैं कि वे सुधारात्मक उपाय करें जो अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। एक तरफ चीनी उद्योग त्रस्त है तो दूसरी ओर गन्ना किसान बकाया के लिए परेशान है।

उद्योग की मांग है की चीनी मिलों के सशक्तीकरण के लिए वित्तीय सहायता देनी चाहिए। वित्तीय मदद समय पर मुहैया नहीं कराई गई तो चीनी उद्योग प्रभावित हो जाएगा।

चीनी मिलों के मुताबिक वे वर्त्तमान में मुश्किल में है और उनका कहना है की चीनी की न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) तय करते समय कई तकनीकी मामलों पर ध्यान नही दिया गया था, जिसका चीनी उद्योग को खामियाजा उठाना पड़ रहा है। उत्पादन लागत से कम चीनी दर के कारण मिलें मुश्किल में है। मिलों का कहना है की वर्तमान 3,100 रुपये प्रति क्विंटल ‘एमएसपी’ चीनी उत्पादन की लागत से कम है।

देश में आज भी गन्ना बकाया कई चीनी मिलों द्वारा नहीं चुकाया गया है क्यूंकि मिलें दावा करती है की उनकी आर्थिक परिस्तिथि ठीक नहीं है जिसके कारण वे बकाया चुकाने में विफल रहे है। MSP बढने के बाद चीनी उद्योग के साथ साथ किसानों को भी बड़ी राहत मिल सकती है। चीनी उद्योग से जुड़े कई संघठनों ने सरकार से MSP को बढ़ाकर 3,300 रुपये प्रति क्विंटल करने पर विचार करने के लिए कहा है।

वही बात गन्ना किसान की करे तो उनका भी कहना है की उनका गन्ना उत्पादन पर खर्च ज्यादा है और उन्हें गन्ना मूल्य कम मिल रहा है। इस बार देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादन राज्य उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया गया है जिसके कारन गन्ने किसान नाराज है। अभी भी देश भर में आंदोलन कर गन्ना किसान मूल्य बढ़ाने की मांग कर रहे है।

इस सीजन महाराष्ट सहित कर्नाटक के चीनी मिलें भी बाढ़ और सूखे की मार झेल रहे है, जिसके कारण कई चीनी मिलों ने पेराई में भाग ही नहीं लिया। महाराष्ट्र के पश्चिमी इलाके में तेज बाढ़ और मराठवाडा में सूखे के कारण गन्ना फसल क्षतिग्रस्त हुई थी, और तो और मराठवाडा में सूखे के कारण काफी सारे गन्ने का इस्तेमाल पशु शिविरों में चारे के रूप में किया गया, जिसका सीधा असर पेराई पर दिखाई दे रहा है। गन्ना और श्रमिकों की कमी के कारण कई मिलों ने पेराई सीजन शुरू करने के बाद केवल कुछ हप्तों में ही पेराई रोक दी है।

ISMA के महानिदेशक अबिनाश वर्मा कहते है, चीनी उद्योग की बेहतरी के लिए गन्ना मूल्य निर्धारण व्यवस्था ठीक हो। चीनी मिलों की आय के आधार पर दाम तय किए जाए। एथनॉल नीति में सुधार हो और मिलों की बैंक लिमिट केवल चीनी स्टाक पर ही नहीं बनायी जाए।

अगर बजट में चीनी उद्योग सहित गन्ना किसानों के लिए राहत पैकेज का ऐलान होता है तो इससे काफी राहत मिलेगी।

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