पश्चिमी महाराष्ट्र : चीनी उद्योग के सामने चुनौतियों का पहाड़

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पुणे : चीनी मंडी

‘कोऑपरेटिव मूवमेंट’ की नीव रखने वाले पश्चिमी महाराष्ट्र ने पुरे देश में चीनी उद्योग का आदर्श स्थापित किया था। महाराष्ट्र के विकास में इस ‘कोऑपरेटिव मूवमेंट’ का बड़ा योगदान रहा है, लेकिन अब इसी पश्चिमी महाराष्ट्र के चीनी उद्योग के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा हुआ है। जिसका सीधा असर लाखो गन्ना किसानों के साथ साथ महाराष्ट्र के विकास पर भी पड़ रहा है। अधिशेष चीनी का ढेर, कीमतों में लगातार दबाव और निर्यात में कमी के कारण मिलें किसानों का बकाया समय पर भुगतान करने में नाकाम रही है।

बकाया भुगतान को लेकर चीनी आयुक्त कार्यालय द्वारा मिलों पर आरआरसी (राजस्व वसूली प्रमाण पत्र) के तहत कार्रवाई की गई है, लेकिन चीनी उद्योग के जानकारों का मानना है की, केवल आरआरसी कार्रवाई से कुछ ज्यादा हासिल नही होगा, चीनी उद्योग को बचाने के लिए ठोस संरचनात्मक उपायों की आवश्यकता है। पश्चिमी महाराष्ट्र की कई सारी चीनी मिलें तरलता की समस्या का सामना कर रही है और यह मिलें सरकार से मदद की गुहार लगा रही है।मिलों की इस हालात का सीधा नकारात्मक असर किसानों पर हो रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने के लिए शुरू कर दिया है।

अच्छी अच्छी मिलों का बुरा दौर…
गन्ना पेराई के बाद 14 दिनों के भीतर किसानों को एफआरपी की रकम देना अनिवार्य है, लेकिन किसानों को पैसा प्राप्त करने के लिए सरकार के हस्तक्षेप की मांग करनी पड रही है। हालाकि,कई बार सरकार भी किसानों को न्याय देने में विफ़ल रही है। पश्चिमी महाराष्ट्र के वारणा, दत्त शिरोल, किसन वीर इन मिलों ने अपने काम से पुरे देश के चीनी उद्योग के सामने आदर्श स्थापीत किया था, लेकिन गौर करने की बात तो यह है की, अब यह भी मिलें मुश्किल दौर से गुजर रही है। अब हालात ऐसे हो गये है की, राज्य की लगभग 68 मिलों पर गन्ना बकाया भुगतान को लेकर आरआरसी के तहत कार्रवाई हुई है।

चीनी उद्योग पर राजनीती हावी…
पश्चिमी महाराष्ट्र के चीनी उद्योग को राकांपा और कांग्रेस के वर्चस्व के हिस्से के रूप में देखा जाता है और कुछ हद तक यह सही भी है। अब भाजपा और शिवसेना के नेताओं ने भी चीनी उद्योग में कदम रखा है और वो उद्योग और राजनीती में भी अहम भूमिका निभा रहे है। दूसरी ओर गन्ना किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए भूतपूर्व सांसद राजू शेट्टी के नेतृत्व में स्वाभिमानी शेतकरी संघठन (एसएसएस ) का गठन हुआ। स्वाभिमानी शेतकरी संघठन ने किसानों के बलबूते पर राजनीती में भी अपनी ‘वोट बैंक’ तैयार की, और अब पश्चिमी महाराष्ट्र की राजनीती में अहम भूमिका निभा रहे है। ‘एसएसएस’ से अलग होकर राज्य मंत्री सदाभाऊ खोत ने ‘रयत शेतकरी संघठन’ की स्थापना की और वह भाजपा के साथ मिलकर कम कर रही है। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में हातकनगले लोकसभा ससंदीय सीट से राजू शेट्टी के हार में खोत ने बड़ी भूमिका निभाई है।

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