बिहार: प्रस्तावित चीनी मिल 13 साल से लंबित

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मधेपुरा: देश भर के कई चीनी मिलें आर्थिक तंगी से जूझ रहे है और किसानों के बकाये नहीं दिए जा रहे। मिलों में वर्तमान पेराई सीजन में पर्याप्त गन्ना नहीं मिल रहे, वहीं दूसरी ओर बिहार के मधेपुरा के उदाकिशुनगंज में मिल लगाने का काम 13 साल से लंबित है। लोगों को इस मिल के शुरु होने से रोजगार मिलने के आसार हैं। मधेपुरा के विधायक इसी गांव में रहते हैं। उनकी कोशिशें भी मिल लगाने में विफल रही है। गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री आज यहां आने वाले हैं। संभावना है कि लंबित मिल के बारे में कोई निर्णय आए।

उदाकिशुनगंज में प्रस्तावित चीनी मिल लगाने की संकल्पना वर्ष 2006 में शुरु हुई। लेकिन इसे लगाने का काम अभी तक किन्ही वजहों से शुरु नहीं हो पाया है। राज्य सरकार के गन्ना विकास मंत्री और उनके सहयोगी एवं अधिकारी उदाकिशुनगंज का दौरा कर चुके हैं और यहां उगाये जाने वाले गन्ने की मात्रा और क्वालिटी को देखकर काफी प्रसन्न हुए थे। गन्ना अधिकारियों के मुताबिक गन्ना अधिग्रहण और मिल के लिए भूमि का अधिग्रहण का काम शुरु हो चुका है। मधुबन और बिहारी गंज में मिल के लिए जमीन ली गई है।

दरअसल, नई चीनी मिल लगाने के लिए खबरों के मुताबिक 300 एकड़ जमीन की आवश्यकता है जिसमें से पौने तीन सौ एकड़ जमीन ले ली गई है लेकिन गांव के कुछ लोगों के कोर्ट में जाने से मामला अधर में चला गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मिल लगने से न केवल गन्ना किसानों को फायदा होता बल्कि स्थानीय युवकों को भी रोजगार मिलता। प्रस्तावित मिल पर इथेनॉल भी तैयार करने का प्रस्ताव था। बिजली भी तैयार की जाती जिससे कि आसपास के इलाकों में बिजली सप्लाई होती। स्कूल और पक्की सड़क भी तैयार होते।

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