एफआरपी की जगह ‘समझौता फ़ॉर्मूला’…चीनी मिलें अब सीधा किसानों के साथ करेंगी अनुबंध

चीनी मिलों को उचित और लागत प्रभावी दरों (एफआरपी) की राशि का भुगतान करने में कठिनाई होती है क्योंकि चीनी की कीमतों में गिरावट हुई है।इससे गन्ना बकाया लगातर बढ़ता ही जा रहा है। 
 
पुणे:चीनी मंडी

वैश्विक और घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में गिरावट के कारण मिलों को एफआरपी भुगतान करने में भी कठिनाई हो रही है। देशभर में चीनी मिलों के पास अबतक लगभग 15 हजार करोड़ रूपये तक एफआरपी बकाया पहुँच गया है। सरकार ने गन्ना भुगतान नही करनेवाली मिलों के खिलाफ कड़े कदम उठाये है। इसके समाधान के रूप में, मिलों ने शेष मौसम के लिए किसानों के साथ सीधे अनुबंध करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अनुबंध के अनुसार, एफआरपी की राशि किसानों को दो या तीन किस्तों में दी जाएगी।

गन्ना नियंत्रण अधिनियम 166 के अनुसार, गन्ने के क्रशिंग के बाद किसानों को 14 दिनों के भीतर एफआरपी भुगतान करना जरूरी होता है। महाराष्ट्र में 31 जनवरी तक 190 चीनी मिलों के पास 13 हजार 305 करोड़ 62 लाख रुपये की राशि बकाया है।अबतक 8 हजार 464 करोड़ 47 लाख रुपये किसानों को दिए गए है। शुगर कमिश्नर शेखर गायकवाड़ ने डिफॉल्ट करने वाली मिलों के खिलाफ रेवेन्यू रिक्रूटमेंट सर्टिफिकेट (RRC) जारी किया है। इसलिए 31 जनवरी के बाद, कुछ मिलों ने 50 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।

कानून के अनुसार, किसानों के साथ अनुबंध किए बिना 14 दिनों के भीतर एफआरपी जारी करना अनिवार्य है। यदि अनुबंध किया जाता है, तो एफआरपी को किश्तों में भुगतान किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि, मिलों को एफआरपी से कम का भुगतान नहीं किया जा सकता है। वार्षिक आम बैठक का निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि, चीनी मिलों को हर किसान के साथ अलग अनुबंध करना होगा। राज्य की 8 मिलों ने आम बैठक में दो से तीन चरणों में एफआरपी देने का फैसला किया है। उन्हें सीधे किसानों के साथ अनुबंध भी करना पड़ेगा।

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