चीनी मिलों को इथेनॉल उत्पादन के लिए हरित मंजूरी की आवश्यकता नहीं

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नई दिल्ली: मोदी सरकार ने आज यहां किसानों के हित में एक बड़ा फैसला किया। सरकार ने घोषणा की है कि अब चीनी मिलों को गन्ने के शीरे से अतिरिक्त इथेनॉल का उत्पादन करने के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी। चीनी मिलों को इससे फायदा होगा। इथेनॉल को कमर्शियल मूल्य से बेचकर मिलें किसानों के बकाये को आसानी से चुका सकती हैं।

केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने अपने एक ट्वीट में कहा कि मोदी सरकार ने किसानों और चीनी उद्योग के फायदे के लिए एक और बड़े फैसले के तहत बी ग्रेड के भारी शीरे से अतिरिक्त इथेनॉल का उत्पादन करने के लिए कोई अलग से पर्यावरणीय मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इससे प्रदूषण नहीं बढ़ता है।

गौरतलब है कि चीनी मिलों पर किसानों का बकाया भुगतान अभी भी बाकी है। किसानों को चीनी के अधिशेष उत्पादन और चीनी के भाव घटने के कारण बकाये का भुगतान नहीं मिल रहा। इसलिए चीनी मिलों में इथेनॉल का उत्पादन करने से किसानों के भुगतान की समस्या का हल आसान हो सकता है।

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