चीनी मिलों ने भुगतान में देरी की तो आरसी जारी करेंगे गन्ना आयुक्त

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बकायेदार चीनी मिलों पर प्रशासन सख्ती के तेवर दिखाएगा। चीनी मिलों ने जल्दी ही बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान करने की शुरूआत नहीं की तो वसूली प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। वसूली के शुल्क के साथ पुराना बकाया वसूल किया जाएगा। इस संबंध में मंडलायुक्त ने बैठक की है। मंडलायुक्त की बैठक के बाद उप गन्ना आयुक्त राजेश कुमार ने मंगलवार को बताया कि आयुक्त ने अगवानपुर, बेलवाड़ा, बिलाई स्थित चीनी मिलों के खिलाफ आरसी के निर्देश दिए हैं।
आरसी की प्रक्रिया के लिए जिला गन्ना अधिकारी अपने जनपद के जिलाधिकारियों से पत्र जारी कराएंगे। जिलाधिकारियों की सहमति के बाद आरसी गन्ना आयुक्त के पास जाएगी। गन्ना आयुक्त के कार्यालय से उनकी मंजूरी पर आरसी जारी हो सकेगी। आरसी जारी होने पर भू-राजस्व की भांति धनराशि की वसूली होगी और किसानों को उनका बकाया दिलाया जाएगा। वसूली का शुल्क भी मिलों को देना पड़ेगा।

उप गन्ना आयुक्त ने यह भी बताया कि संभल जनपद में मझावली स्थित चीनी मिल का भुगतान सबसे खराब है। इसी श्रेणी में रामपुर की करीमगंज और मुरादाबाद की बिलाई चीनी मिल भी शामिल है। दूसरी ओर चीनी मिलों के प्रबंधन का कहना है कि चीनी के दाम में 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट आई है। जो चीनी 3600-3700 रुपये प्रति क्विंटल सीजन की शुरूआत में थी वह चीनी अब 2600-2700 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। ऐसे में भुगतान कैसे हो। सरकार ने गन्ने पर 5.5 रुपये प्रति क्विंटल की मदद देने का एलान किया है पर यह काफी नहीं है। फिलहाल भुगतान की नौबत नहीं है।

गन्ना आयुक्त की बैठक में चीनी मिलों के भुगतान को लेकर समीक्षा हुई थी। जनपद की वीनस शुगर मिल का भुगतान 50 प्रतिशत से कम है। इस पर जब आयुक्त ने पूछा तो मिल प्रबंधन ने एक महीने का समय मांगा लेकिन आयुक्त ने सिर्फ दस दिन का समय दिया है। यह अवधि 20 मई को पूरी हो जाएगी। इसके बाद कड़ी कार्रवाई होगी। जनपद की असमोली और रजपुरा चीनी मिलों का भुगतान 70 प्रतिशत से अधिक है। इन चीनी मिलों से भी कहा गया है कि भुगतान समय पर करें।
– कुलदीप सिंह, जिला गन्ना अधिकारी, संभल।

आरसी के लिए जिलाधिकारी की ओर से एक पत्र जाएगा तब गन्ना आयुक्त आरसी जारी करेंगे। लेकिन अगर शासन के निर्देश होते हैं तो गन्ना आयुक्त अपने स्तर से भी आरसी जारी कर सकते हैं। लेकिन फिलहाल चीनी मिलों से आग्रह किया गया है कि वे गन्ना मूल्य का भुगतान करें।
– राजेश कुमार, उप गन्ना आयुक्त, मुरादाबाद।

SOURCEAmarujala

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