उत्तर प्रदेश के चीनी मिलों ने उन्हें OMCs को एथेनॉल आपूर्ति में शामिल नहीं करने से नारजगी व्यक्त की

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तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के एथेनॉल की आपूर्ति के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट- EOI) आमंत्रित करने वाली नवीनतम निविदा से उत्तर प्रदेश के चीनी मिलें नाराज है क्योंकि EoI के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मिलर्स को बोली के लिए शामिल नहीं किया गया है।

फाइनेंसियल एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के मुताबिक, इसे गन्ना आधारित एथेनॉल उत्पादन प्रयासों के लिए एक झटका कहते हुए, इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) और उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स अस्सोसिशन (UPSMA) ने खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी / DFPD) के संयुक्त सचिव (चीनी) को पत्र लिखा है।दोनों संघठनों ने OMC’s के इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए स्पष्टीकरण मांगा है क्योंकि यूपी का चीनी उद्योग पहले से ही एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भारी निवेश कर चुका है और अधिक निवेश पाइपलाइन में हैं।

ISMA और UPSMA के दोनों पत्रों में कहा गया है कि, EoI गन्ने और शीरा-आधारित डिस्टिलरी में निवेश को हतोत्साहित कर रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि, ओएमसी यूपी के आपूर्तिकर्ताओं के साथ किसी भी दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे, जो कि गन्ना का सबसे बड़ा उत्पादक है, जबकि वे महाराष्ट्र और कर्नाटक से (दूसरा और तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक) खरीदेंगे। उन्होंने आगे यह भी कहा कि, यह प्रधानमंत्री के एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम के विपरीत है।

‘इस्मा’ के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने कहा कि, इससे बैंकों को यह संदेश जाएगा कि इन राज्यों में एथेनॉल परियोजनाओं को हतोत्साहित किया जा रहा है, जिससे वे वहां डिस्टिलरी स्थापित करने वाली शुगर कंपनियों को फंड देने से कतराएंगे। उन्होंने कहा कि, अगर इन राज्यों में और निवेश को रोकने का इरादा है, तो एक स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए ताकि एसोसिएशन अपने सदस्यों को एथेनॉल डिस्टिलरीज में अपनी निवेश योजनाओं की समीक्षा करने की सलाह दे सके। अगर चीनी मिलों को डिस्टिलरी स्थापित करने से हतोत्साहित किया जाता है, तो देश 20% सम्मिश्रण लक्ष्य तक कैसे पहुंच पाएगा।

UPSMA के अध्यक्ष सीबी पटोदिया ने कहा, एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य चीनी के अतिरिक्त स्टॉक को डायवर्ट करना था और इस प्रकार जैव ईंधन के लाभ का विस्तार करना और उन किसानों को आर्थिक रूप से समर्थन देना था, जिन्हें अपने गन्ने के मूल्य का बकाया भुगतान नगदी की कमी से नहीं मिल रहा था। वास्तव में, कई नए एथेनॉल संयंत्र और मौजूदा संयंत्रों का विस्तार स्थापना के एक उन्नत चरण में हैं। इस समय उनके तैयार उत्पाद को प्राथमिकता न देना पूरे क्षेत्र को खतरे में डाल सकता है।

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