कोरोना वायरस: चीनी मिलों की कर्नाटक सरकार से बेलआउट पैकेज की मांग…

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बेंगलुरू: चीनी मंडी

कोरोना वायरस महामारी का मुकाबला करने के लिए देशभर में लॉकडाउन किया गया है। इस लॉकडाउन के कारण कई उद्योगों को करोडों का नुकसान हो रहा है, जिसमें चीनी उद्योग भी शामिल है। लॉकडाउन से कर्नाटक में भी चीनी उद्योग प्रभावित हो रहा है। चीनी की बिक्री में भारी गिरावट आई है और इथेनॉल डिस्पैच भी थम गया है, जिससे चीनी मिलों के राजस्व और नकदी प्रवाह पर बुरा असर पड़ा है।

साउथ इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (SISMA) के अध्यक्ष जगदीश गुडगुंती ने कहा, लॉकडाउन होने के कारण रेस्तरां, आइसक्रीम पार्लर और कन्फेक्शनरी निर्माताओं के बंद होने के बाद चीनी की खपत में भारी गिरावट आई है। पेट्रोल और डीजल की मांग में कमी के कारण इथेनॉल डिस्पैच भी रुक चूका है।

गुडगुंती ने कहा कि, आर्थिक संकट के कारण मिल मालिक लिए किसानों को बकया भुगतान करने में असमर्थ हैं। चीनी उत्पादन पर भी इस सीजन में असर पडा है।

कर्नाटक राज्य में 15 अप्रैल, 2020 तक 63 चीनी मिलों ने पेराई कर 33.82 लाख टन चीनी का उत्पादन किया, जबकि पिछले साल इसी समय, 67 चीनी मिलें गन्ना पेराई कर रही थीं, जिन्होंने 43.20 लाख टन चीनी का उत्पादन किया था।

डेक्कन हेराल्ड के मुताबिक, राज्य में चीनी मिलों ने गन्ने का भुगतान करने और अगले साल कि पेराई करने के लिए सरकार की गारंटी के साथ सॉफ्ट लोन के रूप में 1,000 करोड़ रुपये का पैकेज देने की मांग की है। SISMA ने सरकार से किसानों को मुफ्त में उर्वरक, कीटनाशक, बीज और अन्य सामग्री की आपूर्ति करने और अतिरिक्त ऋण देने को भी कहा है।

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