अब चीनी मिलों द्वारा होगा रिटेल मार्केटिंग

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मुंबई : चीनी मंडी

चीनी की एमएसपी में कमी और निर्यात में गिरावट के चलते चीनी मिलें नकदी तंगी से बेहाल है। किसानों को एकमुश्त एफआरपी चुकाने के लिए मिलों के पास पर्याप्त राशी ही नही है, सरकार द्वारा भी अब मदद मिलने गुंजाईश काफी कम हो चुकी है । इसके चलते कई मिलें खुद ही खुदरा बाजार में उतर रही है ।  महाराष्ट्र के चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड़ ने सोमवार को कहा कि,  50 किलो की पैकिंग में मिलों द्वारा चीनी का कोटा बिना किसी कानूनी समस्या के बेचा जा रहा है।

राज्य में पुणे जिले के दौंड तालुका में श्रीनाथ म्कोसोबा चीनी मिल द्वारा किसानों और उपभोक्ताओं के लिए चीनी की बिक्री शुरू की जाएंगी। बुधवार को शिक्रापुर के पाबोल चौक में थोक बाजार में चीनी की खुले आम बिक्री की जाएगी । चीनी बाजार में मंदी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत  2,900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की  है ताकि किसानों को एफआरपी राशि का भुगतान करने में सक्षम बनाया जा सके।

इसी तरह, चीनी मिलों को हर महीने चीनी का कोटा दिया जा रहा है । हालांकि, शुगर टेंडर्स को उम्मीद मुताबिक बोलियाँ नही मिलने की मिलों  द्वारा शिकायत की जा रही है और इस्सके कारण चीनी का तय कोटा बेचना भी मुश्किल हो रहा है । इसलिए, मिलों को एफआरपी का भुगतान करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को चीनी खरीदते समय लगभग 35 रुपये प्रति किलोग्राम खरीदना पड़ता है। गायकवाड़ ने कहा कि, इसलिए, चीनी विपणन का खुदरा विपणन विकल्प  चीनी उद्योगों के लिए फायदेमंद साबित होगा।

राज्य सरकार को प्रस्ताव प्रस्तुत करें…

बड़ी मात्रा में जेलों और आश्रम स्कूलों को राज्य में चीनी खरीदनई पडती है। चीनी बाजार से चीनी खरीदने के बजाय इसे सीधे चीनी मिलों से खरीदने के राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार को प्रस्तुत प्रस्ताव के बारे में बोलते हुए, गायकवाड़ ने कहा कि,  केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित चीनी की कीमत 29 रुपये प्रति किलोग्राम है और यह बिक्री केंद्र पर 32 रुपये और 50 पैसे की दर से जीएसटी और हैंडलिंग शुल्क सहित उपलब्ध होगा। यदि आप सीधे मिलों से चीनी प्राप्त करते हैं, तो यह 32 रुपये की कीमत पर उपलब्ध होगी । यदि आप मिलों के परिसर में चीनी चाहते हैं, तो यह 33 रुपये प्रति किलोग्राम पर उपलब्ध कराई जाएगी ।

रिटेल मार्केटिंग बढ़ेगी …

पायलट आधार पर लागू की गई इस योजना में राज्य के सभी मिलों की भागीदारी बढ़ाने की योजना है। उन्होंने कहा कि,  पुणे जिले में संत तुकाराम सहकारी चीनी कारखाने जल्द ही पुणे शहर में चीनी-बिक्री की दुकानें शुरू करेंगे। खुदरा बिक्री के साथ, स्वीटनर विक्रेता, पेय पदार्थ निर्माताओं के साथ उपभोक्ताओं को भी उचित मूल्य में मिलों से चीनी मिलेगी।  इससे किसानों को एफआरपी की राशि देना उपयोगी होगा।

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