कर्ज वसूली के लिए चीनी मिलें दिए जाएंगे किराये पर

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पुणे : चीनी मंडी

अधिशेष चीनी, कीमतों में गिरावट और किसानों के बकाया भुगतान में विफलता के कारण महाराष्ट्र में कई चीनी मिलें कर्जे में डूब गई है। 34 मिलों पर राज्य सहकारी बैंक का तकरीबन 538 का कर्जा बकाया है। कई बार मिलों को नोटिस जारी करने के बाद भी यह मिलें कर्ज का भुगतान करने में असफ़ल रही है, इसीलिए अब राज्य सहकारी बैंक द्वारा कार्रवाई की गई सभी 34 मिलों को किराये पर देने के लिए फैसला लिया है। कुछ चीनी मिलों को लीज के लिए 10 से 20 साल तक के करार किये जा चुके है।

अभी तक 6 मिलें लीज पर दी जा चुकी है और इससे बैंक को हर साल 20 करोड़ रूपये मिल रहे है। दूसरी तरफ मिलें शुरू होने से किसानों को भी राहत मिली है, उनका गन्ना समय पर पेराई के लिए जा रहा है। जो मिलें लीज पर दी गई है, उनमे रयत, उदयसिंग गायकवाड, मानगंगा, भाऊसाहेब बिराजदार, शेतकरी सोनी, वसंतदादा शेतकरी मिल शामिल है। राज्य के कई इलाके सूखे से प्रभावित होने से अगले पेराई सीझन में गन्ना उत्पादन घटने की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर मिलों की पेराई क्षमता पर हो सकता है।

थेउर की यशवंत सहकारी मिल की कुछ जमीन बेचकर उससे कर्ज चुकाकर मिल शुरू करने के निर्देश उच्च न्यायलय ने दिए है। इस मिल पर राज्य बैंक के साथ साथ अन्य कई बैंकों का भी कर्ज है, राज्य बैंक ने अन्य बैंकों का कर्जा लेने की भी तैयारी की है। राज्य बैंक द्वारा मिल की जमीन बेचने के लिए समिति का भी गठन किया गया है।

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