शक्कर, भारत और चीन के बीच बढ़ाएगी रिश्तों की मिठास?

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नयी दिल्ली 09 मई: भारत और चीन के अधिकारी कृषि और अन्य व्यापार से जुडे मामलों पर विचार – विमर्श के लिए आज बैठक करेंगे। शिष्टमंडल के नेतृत्व चीन की ओर से उप मंत्री ली गुओ नेतृत्व करेंगे। मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि भारत की ओर से इस बैठक में वाणिज्य , कृषि और पशुपालन, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के अधिकारी हिस्सा लेंगे।

भारत देश में विनिर्मित और कृषि उत्पादों के लिए चीन में अधिक बाजार पहुंच की मांग कर रहा है ताकि व्यापार घाटे को कम किया जा सके। इन उत्पादों में चीनी खास तौर पर शामिल है और इसी के संदर्भ में यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

गौरतलब है कि भारत ने चीन के साथ 380 उत्पादों की सूची चीन के साथ साझा की थी। इनमें कृषि, बागवानी , वस्त्र , रसायन और फार्मा उत्पाद शामिल हैं जिनकी चीन में निर्यात की बहुत संभावनाएं हैं।

गौरतलब है कि तकरीबन दस साल पहले भारत चीन के बीच चीनी का व्यापार बंद हुआ था जिससे दोनों देशों के हित प्रभावित हो रहे थे। लेकिन बीते साल नवम्बर में भारत ने चीन को फिर से चीनी निर्यात करने की ओर ध्यान दिया था और उसी के तहत इस साल भारत ने तकरीबन 20 लाख टन चीनी, चीन को निर्यात करने की योजना बनायी थी।

इसके पीछे वाणिज्य मंत्रालय का तर्क था कि भारत अपने व्यापार घाटे को कम करने के लिए पड़ोसी देश, चीन को चीनी निर्यात करने की योजना पर गंभीर है। इसी के तहत भारतीय चीनी मिल संघ और चीन की सार्वजनिक उपक्रम कंपनी, कॉफको के बीच भारत से 15,000 टन कच्ची चीनी के निर्यात के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर हुए थे। गौरतलब है कि “गैर-बासमती चावल के बाद कच्ची चीनी दूसरा ऐसा उत्पाद है जो चीन, भारत से आयात करगा। विदित हो कि अप्रैल – फरवरी 2018-19 के दौरान भारत का व्यापार घाटा 50.12 अरब डॉलर था। ऐसे में दोनों देशों के बीच फिर से व्यापार शुरु होने से भारत का व्यापार घाटा कम हो सकेगा वहीं चीनी निर्यात के जरिए दोनों देशों के बीच रिश्तों की मिठास भी और बढेगी।

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