उत्तर प्रदेश में चुनाव खत्म होने तक गन्ना बकाया हो सकता है 40 प्रतिशत तक कम…

 

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लखनऊ: चीनी मंडी

गन्ना भुगतान यूपी में हमेशा से एक राजनीतिक मुद्दा रहा है। गुरुवार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में शुरू होने वाले मतदान के साथ, देश के सबसे बड़े गन्ना और चीनी उत्पादक क्षेत्र में किसानों का बकाया अगले कुछ दिनों में लगभग 40% तक कम होने की संभावना है। वर्तमान में 10,000 करोड़ रुपये से ऊपर बकाया हैं। बढ़ते गन्ने के बकाया को लेकर विपक्ष के तीखे हमलों की पृष्ठभूमि में गन्ना बकाया भुगतान को लेकर उठाये गये कदम योगी सरकार को कुछ राहत प्रदान कर सकते है।

जबकि, सरकार ने हाल ही में निजी और राज्य चीनी मिलों के लिए 1,100 करोड़ रुपये जारी किए थे, यूपी में निजी मिलों को चालू पेराई सत्र 2018-19 के लिए केंद्र सरकार के सॉफ्ट लोन योजना के तहत लगभग 3,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यूपी के गन्ना आयुक्त संजय भूसरेड्डी ने बताया कि, लाभकारी चीनी मिलों को नरम ऋण मिलना शुरू हो गया है, जिसका उपयोग वे अपना बकाया निपटाने के लिए करेंगे। उन्होंने कहा, लगभग 900 करोड़ रुपये नरम ऋण कल जारी किए गए थे, जबकि एक और बड़ा हिस्सा आज जारी होने की संभावना है, उन्होंने कहा कि इनमें से शेष धनराशि एक दो दिनों के भीतर संबंधित इकाइयों को वितरित की जाएगी। इस तरह, 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया का लगभग 40% कम होने की संभावना है। बजाज हिन्दुस्थान और सिम्भोली ग्रुप कड़े पात्रता मानदंड के कारण सॉफ्ट लोन योजना का लाभ नहीं उठा सके।

राज्य सरकार ने 24 सरकारी नियंत्रित सहकारी मिलों को गन्ना बकाया के लिए 500 करोड़ रुपये जारी किए थे, और राज्य बिजली उपयोगिता यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने चीनी मिलों के लिए 600 करोड़ रुपये जारी किए थे। हालाँकि, पश्चिमी यूपी निर्वाचन क्षेत्र, जो शुरुआती चरणों में मतदान का गवाह होगा, को इस अनुपात में लाभ नहीं हो सकता है क्योंकि कुल बकाया का लगभग 60% इसी क्षेत्र से है। गन्ना भुगतान का मुद्दा हमेशा से क्षेत्रीय दलों और संगठनों के साथ यूपी में एक ज्वलंत राजनीतिक मुद्दा रहा है, जिसमें राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) और भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) शामिल हैं जो गन्ना किसानों का नेतृत्व करते हैं।

सहारनपुर में रविवार को ‘महागठबंधन’ की रैली में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने आदित्यनाथ सरकार पर बढ़ते बकाया को लेकर तीखा हमला बोला था और कहा था कि, उनके शासनकाल (2007-12) के दौरान, गन्ना भुगतान शीघ्र हुआ था। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव और रालोद सुप्रीमो अजीत सिंह ने भी भाजपा को बकाया राशि के समय पर निपटान को सुनिश्चित करने के अपने वादे को पूरा करने में विफल रहने के लिए जिम्मेदार ठहराया।

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