पानी के कम इस्तेमाल से भी गन्ने की खेती संभव है: शरद पवार

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बारामती (महाराष्ट्र)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि ड्रिप सिंचाई सिस्टम में पानी कम खर्च होता है तथा केंद्र सरकार को खासकर देश के गन्ना किसानों को ड्रिप सिंचाई विधि का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

वे अपने गृह-क्षेत्र बारामती में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार भी मौजूद थे। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया में खेती करने के तरीके बदल रहे हैं तथा नए अनुसंधानों के साथ कृषि उत्पादन भी बढ़ा है। भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में परिवर्तन और सुधार के साथ ही नए प्रयोगों को भी बढ़ावा देने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले इंडोनेशिया में गन्ने की एक नई किस्म की खोज की गई जिसकी खेती में कम पानी लगता है। कुछ विशेषज्ञों को वहां भेजा गया ताकि उसे भारत में लाया जा सके। लेकिन वह जेनेटिक रूप से विकसित (जीएम) किस्म निकली। भारत में सुप्रीम कोर्ट ने जीएम (जेनेटिक मोडिफाइड) प्रयोगों पर रोक लगा रखी है, इसलिए उस प्रक्रिया को रोकना पड़ा।

उन्होंने कहा कि इसका हल ड्रिप सिंचाई सिस्टम से निकाला गया, जिसमें कम पानी के इस्तेमाल से भी गन्ने की खेती संभव है। बारामती और आसपास के इलाकों में अधिकांश किसान ड्रिप सिंचाई का उपयोग कर रहे हैं तथा अब ये यहां घर-घर तक पहुंच गया है। पवार ने कहा कि सरकार गन्ने की खेती में पानी के उपयोग पर लगाम लगाना चाहती है, जो ड्रिप सिंचाई की मदद से ही संभव है। लेकिन इसमें काफी खर्च होता है जो देश के आम किसान नहीं उठा सकते। इसलिए सरकार को आर्थिक मदद और सब्सिडी देकर किसानों को ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

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