गन्ने और बी श्रेणी के शीरे से सीधे एथनॉल बनाने की अनुमति, चीनी मिलों को होगा फायदा

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केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को सीधे गन्ने के रस या फिर बी श्रेणी के शीरे (मोलासेस) से एथनॉल बनाने की अनुमति देने के निर्णय को अधिसूचित कर दिया है। इससे चीनी मिलों को फायदा होने को संभावना है।

केंद्रीय खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 में संशोधन किया गया है। इस निर्णय से चीनी मिलें गन्ना के अधिक उत्पादन होने की स्थिति में गन्ने से सीधे एथनॉल बना सकेगी।

मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार चीनी मिल सीधे गन्ने के रस सा फिर बी श्रेणी के शीरे से एथनॉल का उत्पादन करती है, तो 600 लीटर एथनॉल के उत्पादन को एक टन चीनी के उत्पादन के बराबर माना जायेगा। अभी तक चीनी मिलें केवल निम्न श्रेणी के शीरे से ही एथनॉल बना सकती थी। गन्ने का रस निकालने के बाद जो शीरा बच जाता था, उसमें से चीनी मिलें एथनॉल का उत्पादन करती थी।

शीरे का उपयोग एल्कोहल और स्प्रिट समेत कई अन्य उत्पादों को बनाने में होता है। जून में केंद्र सरकार ने पहली बार बी श्रेणी के शीरे से बने एथनॉल का दिसंबर 2018 से शुरू हो रहे नए सत्र के लिए 47.49 रुपये प्रति लीटर भाव तय किया था। इसके अलावा निम्न श्रेणी के शीरे से तैयार एथनॉल के भाव में भी केंद्र सरकार ने 2.85 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 43.70 रुपये प्रति लीटर तय किया हुआ है।

देश में पेट्रोल में 10 फीसदी एथनॉल मिलाने को अनिवार्य किया हुआ है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में एथनॉल की उपलब्धता नहीं होने के कारण यह 4 फीसदी तक सिमट कर रह गया है। केंद्र सरकार द्वारा एथनॉल के उंचे दाम तय करने से चीनी मिलें एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने को प्रोत्साहित होंगी।

चीनी मिलों ने दिसंबर 2018 से शुरू होने वाले पेराई सीजन के दौरान तेल कंपनियों को 158 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति करने के अनुबंध किए हैं। जबकि पिछले वर्ष केवल 78.6 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति ही की गई थी।

SOURCEOutlook Agriculture

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