तो मुस्कुराएंगे गन्ना किसान, बढ़ेगा चीनी उद्योग

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जागरण संवाददाता, कानपुर : गन्ना और चीनी के बढ़ते उत्पादन ने नई मुश्किल खड़ी कर दी है। सरप्लस उत्पादन के चलते चीनी के दाम गिर गए और गन्ना किसानों का भुगतान अटक गया। भविष्य में भी उत्पादन बढ़ना संभावित है। इन स्थितियों से निपटते हुए कैसे लाभ लिया जा सकता है, इस पर मंथन के लिए राष्ट्रीय शर्करा संस्थान में मंगलवार को राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें शामिल देश भर के विशेषज्ञों ने चीनी उद्योगों और किसानों के लिए रोडमैप तैयार किया।

संस्थान के सभागार में ‘उत्तरी भारत में स्थित शर्करा उद्योग हेतु रोडमैप’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला हुई। एनएसआइ निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि देश में चीनी का कुल उत्पादन लगभग 32 मिलियन टन हुआ है। जिसमें 12 मिलियन टन उत्पादन की सर्वाधिक हिस्सेदारी उत्तरी भारत की चीनी मिलों की रही है। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि देश में चीनी की खपत करीब 25 मिलियन टन है, शेष का निर्यात विश्व बाजार में करने के लिए प्रतिस्पर्धा की जरूरत है। खपत की तुलना में उत्पादन अधिक होने से चीनी के दाम गिरे हैं। उन्होंने गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल और सह-उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया। गन्ने की खोई से बिजली बनाने का भी सुझाव दिया। साथ ही गन्ना मूल्य निर्धारण का ऐसा फार्मूला बताया, जो विदेशों में प्रचलित है। प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि हमने भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल फार्मूला बनाया है, जिसका प्रस्ताव बनाकर भारत सरकार को भी भेजा जाएगा।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के कुलपति प्रो. सुशील सोलोमन और उप्र गन्ना अनुसंधान परिषद शाहजहांपुर के निदेशक डॉ. जे. सिंह ने अपने-अपने वक्तव्य में समान रूप से उत्तर भारत में गन्ने की केवल एक प्रजाति के उत्पादन पर चिंता जताई। सुझाव दिया कि उन्नत प्रजाति के ऐसे विविध गन्नों का उत्पादन करना होगा, जो बीमारियों से भी लड़ सकें। ग्लोबल केन शुगर के प्रबंध निदेशक डॉ. जीएससी राव ने स्पेशल शुगर बनाने और अंतर्फसलीय उत्पादन की जरूरत बताई। कहा कि इसी तरह से किसानों की आय 2022 तक दोगुनी की जा सकती है। भारतीय चीनी मिल एवं उप्र चीनी मिल संघ के प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार की शीरा संबंधी नीति का मसला उठाया, जिसके कारण बड़ी मात्रा में शीरा चीनी मिलों में पड़ा रहा जाता है।

सरकार को सौंपा जाएगा यह प्रस्ताव

SOURCEJagran

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