सरकार! कुछ कीजिए, टूट रहा गन्ना किसानों का सब्र

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Image Credits: Feedipedia

खेतों में खड़ा गन्ना सूखता देखकर बरेली के किसानों के सब्र का बांध टूटने लगा है। मिल, दलाल और सिस्टम की लापरवाही के आगे लाचार किसानों ने अपना दुखड़ा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिख भेजा है। किसानों का कहना है कि जिस खेत में गेहूं खड़ा है मिलों ने वहां गन्ने की पर्चियां दे दी हैं जबकि गन्ना किसानों को दलालों के भरोसे छोड़ दिया गया है।

जिले के सैकड़ों गन्ना किसान इन दिनों बेहद परेशान हैं। इसकी वजह है खेतों में खड़ा गन्ना। पेराई सत्र खत्म होने को है मगर किसानों को अब तक पर्चियां नहीं मिली। मिलें उन किसानों के नाम से पर्चियां जारी कर रही हैं जिन्होंने गन्ना बोया ही नहीं है। मिलों की लेटलतीफी के चलते दलाल किसानों से औनेपौने दामों पर गन्ना खरीदकर बेच रहे हैं। गन्ना विभाग के अफसरों की उदासीनता से नाराज प्रगतिशील किसान अनिल साहनी ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ट्वीट करने के साथ ही उनके पोर्टल पर अफसरों की शिकायत भी की है। उन्होंने कहा है कि दलालों के सक्रिय होने की सूचना देने पर अफसर सबूत मांग रहे हैं और दफ्तरों में बैठकर सबकुछ ठीक होने का दावा कर रहे हैं जबकि किसान खून के आंसू रो रहा है। अगर अगले कुछ दिनों में हालात नहीं बदलते तो किसान कलक्ट्रेट में गन्ने की होली जलाएंगे।
प्रगतिशील किसान अनिल साहनी बोले बरेली के हजारों किसानों का गन्ना खेतों में सूख रहा है। मगर उनको पर्चियां नहीं मिल रहीं। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। मैं अपना दर्द लेकर उप गन्ना आयुक्त के पास गया था। उन्होंने कहा कि मैं जल्दी अपनी बात कहूं और निकल जाऊं। मैंने उन्हें किसानों का दर्द समझाने की कोशिश की तो बोले, आपकी बातों से मुझे इरीटेशन हो रहा है। अपनी बात कहिए और जाइए। मैं निराश होकर लौट आया।

हमने तुरंत कराया समस्या का निराकरण

उप गन्ना आयुक्त सतेंद्र कुमार का कहना है कि एक सज्जन मेरे पास अपनी समस्या लेकर आए थे। मैंने उनकी समस्या का तुरंत निराकरण करा दिया। इसके बाद भी वो नाराज होकर चले गए। मेरी मंशा किसी का निरादर करने की नहीं थी। रही बात गेहूं के खेतों में गन्ने की पर्ची जारी होने की तो हो सकता है सर्वे के दौरान गड़बड़ी के वजह से ऐसा हुआ हो। गड़बड़ी रोकने को मैंने 9000 सट्टे बंद कराए हैं। जो कमियां रह गई हैं उनको भी जल्दी दूर कराया जा रहा है।

किसानों का दर्द
मिलों-अफसरों की साठगांठ, घूम रहे दलाल
ऐंठपुर गांव के किसान छेदालाल ने बताया कि चीनी मिलों और अफसरों की मिलीभगत से पूरे इलाके में दलाल घूम रहे हैं। गन्ना खेतों में सूख रहा है और अफसर उन लोगों को पर्चियां दे रहे हैं जिन्होंने गेहूं बो रखा है। दलालों की घुसपैठ के चलते किसानों को 150 रुपये क्विंटल गन्ना बेचना पड़ रहा है।

अफसर दफ्तरों में बैठकर करते हैं सर्वे
बड़ागांव के ओमप्रकाश ने कहा कि गन्ना विभाग के अफसर दफ्तरों में बैठकर सर्वे करते हैं। इस वजह से किसानों को हर बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनके बेटे अरुण कुमार के खेतों में गन्ना सूख रहा है। मगर पर्ची देने वाला कोई नहीं है। दलाल गांव में मंडरा रहे हैं और सस्ता गन्ना देने को कह रहे हैं।

किसान का हो जाएगा बुरा हाल
मसीतवलीनगर के लालाराम ने बताया कि उनको अब तक केवल चार पर्चियां मिली हैं। बाकी गन्ना खेतों में खड़ा है। कई बार मांगने के बाद भी पर्चियां नहीं दी जा रहीं। जो गन्ना दे चुके हैं उसका भुगतना नहीं हो रहा है। जो हालात हैं उनको देखते हुए लग रहा है कि किसान का बुरा हाल हो जाएगा।

खून के आंसू रो रहा किसान
भंडसर गांव के तारा शंकर मौर्य ने बताया कि अफसर और चीनी मिलों की मिलीभगत के चलते किसान खून के आंसू रो रहा है। गेहूं बोने वालों को पर्चियां दी जा रही हैं और गन्ना बोने वालों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। दलालों के जरिए मिल और अफसर रोज मोटी रकम कमा रहे हैं। मगर देखने वाला कोई भी नहीं है।

SOURCELive Hindustan.com

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