उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और राजनीती में ‘गन्ना’ ही अहम मुद्दा

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लखनऊ: चीनी मंडी 
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और राजनीति में किसी और चीज से अधिक, गन्ना फसल और गन्ना किसान महत्वपूर्ण है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, गन्ना खेती पर लाखों किसानों की आजीविका निर्भर हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 40 जिलों में 55 लाख से ज्यादा  गन्ना  किसान हैं। उत्तर प्रदेश में योगी  सरकार ने मिलों द्वारा राज्य के गन्ना किसानों के बकाया राशि का समय पर भुगतान हो सके इसलिए  पहले ही ५५०० हजार करोड़ रुपये का पैकेज दिया था, जो अब 11,000 करोड़ रुपये के आंकड़े  को पार करने की संभावना हैं।
आर्थिक और राजनीतिक संघर्ष में गन्ना अहम मुद्दा 
उत्तर  प्रदेश देश का गन्ना उत्पादन भारत के कुल उत्पादन के एक तिहाई से ज्यादा है।  पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसी व्यक्ति या पक्ष को ‘राजनीतिक फसल’ लेनी है तो फिर उनको गन्ना किसानों का समर्थन अनिवार्य है। अगर आप गन्ना किसानों के हितों की बात करोगे,तभी आप की राजनीति भी सफल होगी, यह यंहा का आजतक का राजकीय इतिहास बताता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शक्तिशाली जाट किसान नेता के रूप में उभरे चौधरी चरन सिंह भी गन्ना किसानों के हितों की बात करते थे , जिसने उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधान मंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया। चरन सिंह के साथ साथ महान किसान नेता महेंद्र सिंह टिकेत भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आते है। टिकेत ने अपने हजारों अनुयायियों को 1980 के दशक के अंत में दिल्ली के राजपथ पर लाया था, उन्होंने तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी को गन्ना की कीमत बढ़ाने के लिए मजबूर किया।
आज की स्थिती हुई विपरीत
सरल शब्दों में कहा जाए, तो जब चीनी की बात आती है, तो भारत में कम कीमत, जादा आपूर्ती ऐसी बहुत सारी समस्याएं होती हैं।देश में 2017-18 सीज़न में चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ, जिसमें थोक बाजार में चीनी की कीमते चीनी मिलों की उत्पादन लागत से नीचे गिर गई, जिसकी उझ से मिलें किसानों का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं। इसके लिए चीनी की विश्व बाजार में लगातर फिसलती कीमत भी प्रमुख कारक हैं। 2017-18 में, भारत का चीनी उत्पादन 32 मिलियन टन था , जो २०१६-२०१७ वर्ष की तुलना में 58 प्रतिशत अधिक था । लेकिन विश्व बाजार में 2017 फरवरी से सफेद चीनी की  कीमते लगभग 30 फीसदी गिर गई है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ‘को- 0238’ गन्ने के बीज की बुआई की जा रही है, जिससे उच्च पैदावार भी बढ़ी है। गन्ने के रिकॉर्ड स्तर उत्पादन का  ‘को- 0238’ यह भी एक प्रमुख कारण मन जाता है ।
‘जिन्ना’ नहीं ‘गन्ना’ ही सबकुछ …
इस साल मई में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कैराना लोकसभा उप-चुनाव में मिली हार बीजेपी के लिए एक झटका था। कैराना में चुनावी जंग में “जिन्ना” और “गन्ना (गन्ना)” के बीच  लढी गई। बीजेपी ने  अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना के चित्र को कैराना चुनाव अभियान के दौरान एक  मुद्दा बना दिया गया। लेकिन  चुनाव राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के उम्मीदवार ताबासम हसन ने जीता था, जिनका कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने समर्थन किया था। बीजेपी के लिए  यह हार एक बड़ा सबक था,  गन्ना किसानों की समस्याओं को हल्के में लेने की भूल भरी पड़ सकती है, यह सन्देश कैराना उप चुनाव ने दिया था । गन्ना किसान 25 उत्तर प्रदेश लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं  और सभी राजनीतिक दलों 201 9 के लोकसभा चुनावों के चलते उस पर ध्यान देंगे।
SOURCEChiniMandi

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