राज्य सरकार किसानों को गन्ने का देश में सबसे अधिक मूल्य दे रही है; फ़िलहाल बढ़ोतरी मुमकिन नहीं: मुख्यमंत्री

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चंडीगढ़: हरियाणा में गन्ना मूल्य को लेकर बवाल बढ़ता ही जा रहा है। किसान की मांग है की गन्ना भाव बढ़ाया जाए वही दूसरी और  हरियाणा के मुख्यमंत्री एम एल खट्टर ने इसे बढ़ाने से इंकार कर दिया है। उन्होंने ने गुरुवार को गन्ने की कीमतों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि, कोई भी वृद्धि मिलों के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है जो इस समय घाटे में चल रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि, वर्तमान में 340 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने की कीमतें, देश में सबसे अधिक हैं। खट्टर हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के कई विधायकों द्वारा गन्ना किसानों से जुड़े गन्ना मूल्य से संबंधित मामलों पर जवाब दे रहे थे।

प्रारंभ में, कृषि मंत्री जेपी दलाल जवाब दे रहे थे, लेकिन कांग्रेस सदस्यों द्वारा उन्हें बार-बार बाधित किया गया, जब उन्होंने यह विवरण देना शुरू किया कि, सरकार किसानों की आय को दोगुना करने का इरादा रखती है और विभिन्न फसलों के  ‘एमएसपी’ में बढ़ोतरी सहित अन्य कदम उठाए जा रहें है। इस पर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने मंत्री से कहा कि, उन्हें गन्ना किसानों के बारे में विवरण देना चाहिए और यह भी बताना चाहिए कि गन्ने की कीमतें बढ़ाने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।

दलाल ने कहा कि, किसानों की आय को दोगुना करना भी गन्ना मूल्य में वृद्धि से जुड़ा था। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट  कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने सदन के वेल में पहुंचे और कुछ ने राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाए। हुड्डा ने कहा, पिछले पांच वर्षों के दौरान, सरकार ने गन्ने की कीमतों में केवल 30 रुपये की वृद्धि की है। हम चाहते हैं कि, मंत्री केवल गन्ना किसानों के संदर्भ में अपना जवाब दें। तब मुख्यमंत्री खट्टर ने हस्तक्षेप किया और मामले में जवाब देना शुरू कर दिया, उन्होंने जोर देकर कहा कि, चूंकि चीनी मिलें घाटे में चल रही है, इसलिए सरकार की प्राथमिकता गन्ना मूल्य में वृद्धि के बजाय किसानों को समय पर भुगतान करना है। गन्ने की कीमतों में बढ़ोतरी तब तक संभव नहीं है,  जब तक कि चीनी मिलें लाभदायक नहीं हो जातीं, जिसके लिए राज्य सरकार ने कई उपाय कर रही है। पिछले पांच वर्षों के दौरान गन्ने की कीमतों में 30 रुपये की बढ़ोतरी के कांग्रेस के आरोप का जवाब देते हुए खट्टर ने कहा कि, 1970 और 1980 के दशक में भी एक समय था जब कांग्रेस ने राज्य पर शासन किया था और पाँच साल तक कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी और इसके बजाय गन्ने की कीमतें कम हुई थीं।

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