तमिलनाडु चीनी उद्योग को केन्द्र से सहयोग की अपेक्षा

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चैन्नई, 04 नवम्बर: तमिल नाडु में चीनी उदयोग कपडा उद्य़ोग के बाद प्रदेश के सबसे बडे रोजगार और कारोबारी क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। चीनी उद्योग प्रदेश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आर्थिक आधार है। इस उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर हजारो लोगों की आजीविका जुडी है। चीनी उद्योग की इसी महत्ता को देखते हुए 1969 में यहां चीनी विभाग की स्थापना की गयी ताकि गन्ना विकास के साथ चीनी मिलों को बढावा दिया जा सके। यहां का चीनी उद्योग प्रदेश के सबसे पुराने उद्योगों का हिस्सा रहा है जो ग्रामीण और शहरी आबादी के लिए सालों से रोजगार और राजी रोटी का माध्यम है।

प्रदेश में चीनी उद्योग के महत्व को समझते हुए सरकार भी लगातार इसे बढ़ावा देती रही है। लेकिन बीते कुछ समय से सूबे में चीनी मिलें आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने इस संदर्भ में दक्षिण भारत चीनी मिल संघ के साथ बैठक कर समस्या के समाधान के लिए कई दौर की वार्ताएं की लेकिन कोई स्थाई हल नहीं निकला। अब सरकार ने चीनी उद्योग को मजबूत बनाने के लिए बैंको से वित्तीय सहायता लेने की पहल की है। मुख्यमंत्री ने इस संदर्भ में बैकों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की और चीनी मिलों को सस्ती दर पर ऋण देने के विकल्प तलाशने पर मंथन किया है। मिलों के पुर्नगठन के लिए ऋण पैकेज की भी मांग की गयी है। मुख्यमंत्री ने इस सदर्भ में केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुकालात कर प्रदेश के इस पुराने उद्योग को आर्थिक संबल देने की मांग की है ताकि सालों से चल रहे इस उद्योग को फिर से पटरी पर लाया जा सके। चीनी उद्योग की माली हालत के कारण मिलें गन्ना किसानों का बकाया समय पर नहीं चुका पा रही है इसलिए गन्ना किसानों के कर्ज वितरण के लिए भी केन्द्र से ऋण वितरण में सहयोग की मांग की गयी है।

प्रदेश में बंद होती चीनी मिलों को फिर से पटरी पर लाने के सरकार के प्रयासों पर मीडिया से बात करते हुए तमिलनाडु के खाद्य, नागरिक आपूर्ति, और उपभक्ता मामलों के मत्री थीरु आर कामराज ने कहा कि सूबे का चीनी मिल उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है। सरकार इसको लेकर गंभीर है। सभी तरह के जरूरी कदम उठाये जा रहे है। नीजि और सार्वजनिक क्षेत्र की चीनी मिलों को चीनी विकास निधि और बैंको के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने के तमाम प्रयास किए जा रहे है। कामराज ने कहा कि केन्द्रीय वित्त मंत्री से मुख्यमंत्री की मुलाकात काफी सकारात्मक रही है। केन्द्र से हम सहयोग की अपेक्षा करते है। आशा है जल्द ही हमारे प्रयास रंग लाएंगे और मिलों के लिए ऋण पुर्नगठन वित्तीय पैकेज की घोषणा होगी।

कामराज ने कहा कि प्रदेश सरकार ने केन्द्र से सूबे की चीनी मिलों को अतिरिक्त चीनी जारी करने के लिए भी आग्रह किया है ताकि मिलों की वित्तीय हालत में सुधार किया जा सके। मंत्री ने कहा कि गन्ना किसान इस स्थिति में नहीं है कि अगली गन्ने की फसल के लिए खुद से पैसा लगा सके। इसके लिए केन्द्र से अविलम्ब किसानों को ऋण सुविधा देने की मांग की गयी है।

दक्षिण भारत चीनी मिल संघ, तमिलनाडु के अध्यक्ष पलानी जी पेरी स्वामी ने कहा कि सरकार से हमारी कई दौर की वार्ता हुई है। सरकार चीनी मिलों के साथ खडी है लेकिन हमें जल्द से जल्द वित्तीय मदद की दरकार है ताकि आगे के काम किए जा सके। चीनी मिलों के पास अभी सरप्लस पैसा नहीं इसलिए गन्ना किसानों का बकाया चुकाने में भी देरी हो रही है। स्वामी ने उम्मीद जताई कि जल्द सब ठीक हो जाएगा और चीनी मिलें सभी गन्ना किसानों का बकाया चुकाएंगी।

गौरतलब है कि गन्ने की खेती और चीनी उद्योग से जुडे कारोबार के मामले में दक्षिण भारत में तमिलनाडु प्रदेश के अग्रणी राज्य के तौर पर जाना जाता रहा है । यहां नलिकापुरम, पुगुलुर, कोयम्बटूर और पंड्य़ाराज पुरम जैसे इलाके गन्ने की खेती के लिए देशभर में प्रसिद्द रहे है। गन्ने की बम्पर खेती करने वाले इस प्रदेश के करीब साढे चार लाख से भी अधिक किसानों की आजीविका गन्ना और चीनी उद्योग से जुडी है ऐसे में राज्य और केन्द्र सरकार को समय रहते न केवल प्रदेश के इस उद्योग को पटरी पर लाने की जरूरत है बल्कि प्रौत्साहन देकर वित्तीय मदद करने की भी जरूरत है ।

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