तमिलनाडु चीनी उत्पादक से बन गया चीनी आयातक

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चेन्नई : चीनी मंडी

तमिलनाडु के चीनी उत्पादन में भारी गिरावट आई है, विशेष रूप से पिछले सात से आठ वर्षों में भारत के चौथे प्रमुख निर्माता राज्य से अब तमिलनाडु आठवें स्थान पर पहुंच गया है।

तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केएस अलागिरी, ने कहा की राज्य का चीनी उत्पादन, जो कि 2011-12 में 23.79 लाख टन था, 2018-19 के दौरान 8.40 लाख टन पर आ गया है, जिससे तमिलनाडु अब चीनी आयातक बन गया है। राज्य में चीनी अर्थव्यवस्था के सभी प्रमुख हितधारकों को एक गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। और सत्तारूढ़ पार्टी को कोई फिक्र नहीं है।

राज्य की चीनी अर्थव्यवस्था में निराशाजनक तस्वीर की व्याख्या करने वाले कुछ बुनियादी तथ्यों में प्रमुख तथ्य है, गन्ने की खेती का क्षेत्र सिकुड़ रहा है, जिससे गन्ना उत्पादन में कमी के कारण इस साल आठ निजी चीनी मिलों और एक सहकारी चीनी मिलों ने पेराई को रोक दिया है। जो चीनी मिलें शुरू थीं, उन्होंने उनकी स्थापित क्षमता का केवल एक-तिहाई कार्य किया, अपने बैंक ऋणों को चुकाने में असमर्थ अधिकांश निजी चीनी मिलें “एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां) देनदार बन गए हैं।

रूठा हुआ मानसून, ठप चीनी मांग और कीमतों में गिरावट के कारण तमिलनाडु में चीनी उद्योग डगमगा गया है। 30,000 मिल मजदूरों, 1.5 लाख अप्रत्यक्ष कर्मचारियों और पांच लाख गन्ना किसानों के अनिश्चित जीवन में धकेल दिया है। नौ चीनी मिलें (आठ निजी स्वामित्व वाली और एक सहकारी) गन्ने की कमी के कारण इस सीजन में पेराई नही करेंगे और शेष मिले अपने संयंत्र को अपनी क्षमता के एक तिहाई पर संचालित करेंगे। राज्य की 25 चीनी मिलों में से कम से कम 13 मिलें बैंकों की एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ) में हैं, और यह ऋण की वसूली प्रक्रिया के हिस्से के रूप में बंद होने की संभावना बनी हुई हैं। तमिलनाडु को 2012 में चौथे सबसे बड़े चीनी उत्पादक से अब आठवें स्थान पर धकेल दिया है।

अलागिरी ने कहा की , ईआईडी पैरी जो चीनी उद्योग का एक प्रमुख खंड था, अपनी दो चीनी मिलों को बंद करने पर विचार कर रहा है, जबकि साक्षी शुगर्स, थिरुआरोरण शुगर्स और श्री अंबिका शुगर्स ने कथित तौर पर चीनी उत्पादन को रोकने का फैसला किया है। इसी समय, राज्य में चीनी मिलों पर किसानों का 500 करोड़ रुपये बकाया है। जबकि तमिलनाडु की चीनी की आवश्यकता 18 लाख टन आंकी गई है, राज्य का उत्पादन अब केवल 8.40 लाख टन है, तमिलनाडु में पीडीएस वितरण को पूरा करने के लिए अन्य राज्यों से भी चीनी खरीदनी होगी।

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