बारिश के अभाव के कारण तमिलनाडु की चीनी मिलें मुसीबत में

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चेन्नई : चीनीमंडी

तमिलनाडु में पिछले पांच वर्षों में 2015 को छोड़कर चार वर्षों में बारिश की कमी है, जिससे गन्ने की उपलब्धता में भी कमी हुई है। कम गन्ने की पेराई से मिलों की चीनी उत्पादन लागत में वृद्धि हो जाती है। राज्य की लगभग आधी निजी चीनी मिलें आर्थिक रूप से संकट में हैं। राज्य में 25 सहकारी और 18 निजी मिलें हैं; जिसमे से इस साल लगभग एक दर्जन से अधिक मिलों में पेराई नहीं हो रही हैं।

वर्ष 2018 में तमिलनाडु में 24 प्रतिशत बारिश की कमी देखी गई। उत्तरी राज्यों की मिलों की तुलना में, कम क्षमता पर मिलों का संचालन करने से उत्पादन की लागत में 10 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई है। अगर इस साल मानसून अच्छा रहा तो ही अगले साल उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। दक्षिण भारतीय चीनी मिल संघ के प्रदेश अध्यक्ष पलानी जी पेरियासामी का कहना है कि, तमिलनाडु में मिलों की 2011-12 की पेराई क्षमता 99 प्रतिशत से घटकर 2018-19 में 35 प्रतिशत रह गई है। 2011-12 में उत्पादन 2.38 मिलियन टन था और 2018-19 में यह 0.85 मिलियन टन तक पहुँच गई है।

मुरुगप्पा समूह का हिस्सा ईआईडी पैरी ने तमिलनाडु की अपनी चार चीनी मिलों में से दो को बंद कर दिया है। राज्य 2015 तक देश का तीसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक था, लेकिन उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के बाद चौथे स्थान पर खिसक गया।

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