टैक्स में कटौती करने से भारतीय कंपनियों को मिल सकता है यूएस-चीन ट्रेड वॉर का फायदा

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नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती से न केवल नए निवेश को बल मिलेगा बल्कि भारतीय कंपनियों को यूएस-चीन ट्रेड वॉर से उत्पन्न अवसरों का फायदा भी मिलेगा।

यूएस-चीन ट्रेड वॉर के कारण एशिया में ग्लोबल सप्लाई चेन काफी मजबूत हुई है। ऐसे में फेवरेबल टैक्स रेट खासकर बड़े नए प्रोजेक्टों के लिए यहां रास्ता खुलेगा और कंपनियां चीन जाने की बजाय भारत में अपने प्रोजेक्ट खड़ा कर सकेंगी।

इंडस्ट्री एसोसिएशनों जैसे की एमसीसीआई ने कहा कि भारत को प्रतिस्पर्धा मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे पड़ोसी देशों से अधिक है, क्योंकि वे भी समान अवसर प्राप्त करने के लिए तैयार हैं।

इंडस्ट्री के लोग, जो खासकर ऑटो कांपोनेंट और इंजीनियरिंग सेक्टर से हैं, को भारत से आपूर्ति की संभावना तलाशने में लगे हैं। लेकिन उनकी राय में सबसे बड़ी बाधा थाईलैंड या वियतनाम जैसे देशों की तुलना में हमारे यहां उच्च कॉर्पोरेट टैक्स रेट थी। हमें डर था कि कहीं हम इन देशों के सामने अवसर से न चुक जाएं।

एमसीसीआई के प्रेसिडेंट रामकुमार राममूर्ति ने कहा कि भारत कौशल उपलब्धता और श्रम लागत की तुलना में दूसरों के बनिस्पत काफी अच्छा है। लेकिन नए निवेश को यहां आकर्षित करने के लिए टैक्स टैरिफ बड़ा अवरोध था। इस संदर्भ में वित्त मंत्री ने शुक्रवार को घोषणा की कि कोई भी नई घरेलू कंपनी, जो 1 अक्टूबर, 2019 को या उसके बाद बनाई जाती है और मैन्युफैक्चरिंग में नया निवेश लाती है, को 15 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान करने का विकल्प होगा। उन्होंने कहा कि यह लाभ उन कंपनियों के लिए उपलब्ध है जो किसी भी छूट / प्रोत्साहन का लाभ नहीं उठाती हैं और 31 मार्च, 2023 को या उससे पहले अपने उत्पादन का काम शुरू करती हैं। इन कंपनियों के लिए प्रभावी टैक्स रेट अधिभार और उपकर को मिलाकर 17.01 प्रतिशत होगी। इसके अलावा, ऐसी कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी।

वित्त मंत्री के कदम का जोरदार स्वागत करते हुए राममूर्ति ने कहा कि भारत में नए निवेशों पर कॉर्पोरेट टैक्स को कम करने की एमसीसीआई की सिफारिशों को वित्त मंत्री ने मान लिया गया है। हमें वर्तमान वैश्विक व्यापारिक स्थिति का फायदा लेना चाहिए और यूस-चीन के बीच उत्पन्न ट्रेड वॉर के मद्देनजर नए निवेश आमंत्रित करने से चुकना नहीं चाहिए और उनके लिए सारी सुविधाएं सरल बनानी चाहिए। अवसर का फायदा अवश्य उठाएं।

श्री राममूर्ति ने कहा कि मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे पड़ोसी देशों में 19 से 24 प्रतिशत के बीच कॉर्पोरेट टैक्स है। हमने नए निवेश औऱ कंपनियों को आकर्षित करने के लिए कॉर्पोरेट टैक्स को कम करके 20 प्रतिशत किया है, जिससे कि पड़ोसी देशों में अपने संयंत्रों को स्थानांतरित करने वाली कंपनियां भारत में अपने प्लांट लगा सकें। इसलिए यह एक अच्छा और सामयिक कदम है। इससे न केवल पूंजी निर्माण में मदद मिलेगा बल्कि रोजगार और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस बीच, एक प्रमुख इंडस्ट्री एसोसिएशन के एमएसएमई पैनल के एक वरिष्ठ सदस्य ने हाल ही में कहा कि अमेरिकी कंपनियों ने पहले ही भारत में अवसरों को तलाशना शुरु कर दिया है और जल्द ही यहां मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में नए अवसरों को भुनाने के लिए कुछेक प्रतिनिधिमंडल दौरा भी कर सकते हैं।

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