आजादी के बाद देश में हुआ चीनी मिलों का तकनीकी विकास  

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नई दिल्ली, 16 दिसम्बर: भारत कृषि प्रधान देश रहा है। देश में आदिकाल से लेकर आज तक कृषि कार्य होता आया है। पहले के दौर में तकनीकी विकास नहीं था लेकिन कृषि और कृषि से जुडे सहयोगी व्यवसाय तब से चलते आये हैं। गन्ने से गुड, चीनी और खांडसारी बनाने का काम आदिकाल से होता आया है। देश के आज़ाद होने के पहले देश में गन्ने से परंपरागत तरीक़ों से चीनी तैयार की जाती थी। देश में चीनी उद्योग के विकास की शुरुआत 1903 में हुई थी। तत्कालीन अंग्रेज़ी हुकूमत के दौर में गन्ना उत्पादक इलाक़ों में चीनी मिलें लगना शुरु हुई। 1903 से 1931 के बीच में तक़रीब 29 कारख़ाने लगाए गए। बाद में जैसे जैसे अंग्रेज़ी शासन को मिलों से फायदा होने लगा तो इनकी संख्या बढ़ती गयी। देश के आज़ाद होने के बाद 1950 में 139 चीनी मिलें लग चुकी थी। देश आज़ाद हुआ उसके कारख़ाने लगे तो चीनी मिलों को भी बढ़ावा मिला। सरकार ने चीनी मिलों की संख्या और बढ़ाई और मिलों में परंपरागत काम की जगह तकनीकी और मशीनी युग आने लगा। धीरे धीरे देश में कपास उद्योग के बाद चीनी उद्योग ही सबसे बड़ा कृषि आधारित उद्योग बनता गया। इसलिये सरकार ने जहां ज़रूरत पड़ी वहीं नई चीनी मिलों लगाना शुरु किया। समय के साथ विकास के आयाम गढ़ते गए और चीनी मिलों की संख्या बढ़ती गयी। 2003 आते आते देश में चीनी मिलों की संख्या और बढ़ी। 2003 के आँकड़ों की बात करें तो तब देश में 453 चीनी के कारखाने थे। आज देश में क़रीब 510 से ज्यादा चीनी मिलें है।

इस उद्योग से तक़रीबन 3 लाख लोगों की आज आजीविका जुड़ी है। देश में चीनी उत्पादन में कीर्तिमान स्थापित किए जा रहे है। आज़ादी के बाद सन 1950 में चीनी का कुल उत्पादन 11.3 लाख टन था। 2000-2003 में यह उत्पादन 201.32 लाख टन पहुँच गया और 2018-19 में देश में चीनी उत्पादन तक़रीबन 332 लाख टन पहुँच गया। आँकड़ों से साफ़ पता चल रहा है कि देश में गन्ना और चीनी उद्योग नें न केवल सतत प्रगति की है बल्कि चीनी मिलों का तकनीकी विकास और आधुनिकीकरण भी हुआ है।

देश में गन्ना विकास और चीनी उद्योग की विकास यात्रा पर बात करते हए भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, कोयम्बटूर के निदेशक डॉ बक्शीराम ने कहा कि पहले सिर्फ़ यूपी बिहार में चीनी के कारख़ाने थे, आज यूपी, बिहार के अलावा महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक,और आंध्र प्रदेश जैसे कई राज्यों में चीनी मिल लगी हुई है। मिलों के विस्तार से न केवल गन्ना किसानों को फ़ायदा हुआ है बल्कि चीनी मिलों को भी लाभ हो रहा है। डॉ. बक्शीराम ने कहा कि आज चीनी उद्योग देश का महत्वपूर्ण उद्योग बन गया है। देश के तक़रीबन 50 मिलियन गन्ना और 5 लाख से अधिक व्यक्तियों की आजीविका चीनी मिलों से जुड़ी है।

देश में सरकारें किसी की भी रही हो गन्ना किसान और चीनी मिलों के कल्याण और विकास के लिए न केवल वे लगातार क्रियाशील है बल्कि किसानों और चीनी मिलों के हित में नई नई नीतियाँ और योजनाएं बनाकर ज़मीनी स्तर पर उन्हें क्रियान्वित करने का काम भी करती रही है।

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