नई तकनीक…अब मशीन से ही गन्ना रोपाई, खाद-स्प्रे सबकुछ होगा संभव

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नई दिल्ली / भोपाळ: चीनी मंडी

नई तकनीक के साथ अब गन्ना खेती करना किसानों के लिए आसान हो सकता है, इस लिए नई मशीन इजाद की गई है। इसमें गन्ने की रोपाई, खाद, स्प्रे करना सबकुछ एक ही मशीन से होगा। इसका नाम शुगर केन प्लांटर मशीन है। इस मशीन के इस्तेमाल में मजदूर भी कम लगते है।

मध्यप्रदेश में यह मशीन पहली बार नरसिंहपुर जिले में आ रही है। इसे शुगर मिल खालसा एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग मेरठ से मंगवाई है। कृषि वैज्ञानिकों का दावा है कि, यह आठ घंटे में करीब ढाई एकड़ में गन्ना पौध की रोपाई कर सकती है। इस काम में तीन मजदूरों से ही काम चल सकता है। यही नहीं रोपाई में लगभग 92 क्विंटल गन्ने की बचत भी होगी। इससे फसल स्वस्थ रहने का भी दावा किया गया है। इस मशीन की कीमत लगभग 2 लाख रुपए है, इस पर एससी-एसटी और सामान्य वर्ग को 40-50 फीसदी तक अनुदान भी है। मध्यप्रदेश में नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, बुरहानपुर, बैतूल व दतिया में गन्ना उत्पादक जिलों में 104400 हेक्टेयर में गन्ना लगाया जाता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार गन्ने की आंख काट ली जाती है। परंपरागत विधि से किसान प्रति हेक्टेयर करीब 100 क्विंटल गन्ने का बीज खेत में डालते हैं। नई विधि से केवल 8 क्विंटल गन्ने से काम चल जाएगा। इस विधि में किसान 30 क्विंटल गन्ना लेते हैं और 8 क्विंटल आंखें ही पौध के लिए निकालते हैं। शेष 22 क्विंटल गन्ना किसान शुगर मिल में बेच सकते हैं। करीब 20 से 25 दिन में गन्ने की पौध तैयार हो जाती है।

क्या है पौधरोपण की तकनीक 

पौधरोपण मशीन को ट्रैक्टर के पीछे लगा एक व्यक्ति चलाता है, जबकि दो व्यक्ति मशीन पर बैठते हैं। ये दोनों ट्रे में तैयार पौध को रखते रहते हैं और मशीन ट्रे से पौध को उठा खेत में रोपाई कर देती है। इससे पहले खेत को अच्छी तरह तैयार किया जाता है और जुताई कर मिट्टी बारीक की जाती है। मशीन को जितना चाहे, उतनी दूरी पर सेट कर सकते हैं। इससे गन्ने के साथ-साथ इंटरक्रापिंग यानी अंतर-वर्ती फसल लेने में कठिनाई नहीं होती। किसान करीब 20 प्रकार की फसलें गन्ने के साथ आसानी से ले सकते हैं।

परंपरागत तरीके से गन्ने की बिजाई करने से प्रति हेक्टेयर करीब 10 मजदूरों की जरूरत होती है, लेकिन मशीन से रोपाई करने में तीन मजदूरों से ही काम चल जाता है। एक हेक्टेयर गन्ने की पौध की रोपाई 8 घंटे में ट्रैक्टर से की जा सकती है। फसल की आवक 20 से 25 दिन पहले हो जाती है। बड चिपिंग से गन्ने की काफी बचत होती है। गन्ने से आंख काटे जाने के बाद किसान के पास जो गन्ना बचता है, उसे वह शुगर मिल में बेच सकता है। अमूमन जब किसान 100 क्विंटल तक गन्ने का बीज खेत में डालते हैं तो 90 फीसदी से अधिक गन्ना बेकार चला जाता है।

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