“आम बजट से न तो गन्ना किसानों को कुछ फायदा होगा और न ही चीनी उद्योग का कायाकल्प होगा” – रोहित पवार

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नई दिल्ली, मुंबई, 2 फरवरी: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के दूसरे कार्यकाल के दूसरे आम बजट 2020-21 में देश के गांव, गरीब और किसानों के कल्याण और विकास के लिए कई तरह के प्रावधान किए गए है। ग्रामीण विकास से जुडे इस बजट में सरकार ने इस बार बीते साल के 2.40 करोड़ रूपये की तुलना में बढ़ोतरी करते हुए 2.83 लाख करोड़ रूपयों की सौगात दी गयी है।

आम बजट मे कृषि से जुडे प्रावधानों के दूरगामी प्रभावों पर बात करते हुए इंडियन सुगर मिल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रोहित पवार ने मुंबई से फोन लाइन पर बात करते हुए कहा कि बजट में मोदी सरकार ने सिर्फ आंकडों की जादूगरी की है और मीडिया फ्रेंडली बजट बनाया गया है जिसमें प्रेस के लिए मसाला तो बहुत कुछ है लेकिन किसानों के लिए कुछ नहीं है। पवार ने कहा कि बजट में हर साल नई घोषणाएं की जाती है लेकिन बीते साल के बजट की घोषणाएं नए बजट से पहले दम तोड चुकी होती है। रोहित पवार ने कहा कि वर्तमान बजट से न तो गन्ना किसानों और इसकी खेती को कुछ फायदा होगा और न ही चीनी उद्योग का कायाकल्प होगा। जब सरकार ने गन्ने का एमएसपी बढाने और गन्ने का उत्पादन अधिक होने की स्थिति में इन्सेन्टिव देने की पहल की थी तो सभी ने स्वागत किया था। उसके बाद चीनी मिलोे के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया तैयार करने के लिए इथेनॉल बनाने की अनुमति देना भी अच्छी पहल रही। इसी क्रम में पैट्रोल कम्पनियों के लिए 10 फीसदी इथेनॉल मिलाने की बाध्यता को लागू करना सरकार का अच्छा फैसला रहा। सरकार के इन निर्णयों के बाद देश के चीनी उद्योग को उम्मीद थी कि बजट में कुछ विशेष प्रावधान किए जाएगें लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। आम बजट चीनी उद्योग के लिए ऊंट के मुंह में जीरा की कहावत चरितार्थ करता है। बजट में गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए भी कुछ अलग से नहीं किया गया है।

आम बजट पर मीडिया से अपनी राय प्रकट करते हुए भारत सरकार के कृषि एवं बागवानी आयुक्त डॉ एस के मल्होत्रा ने कहा कि बजट सबका साथ और सबका विकास की थीम पर आधारित है। बजट में गांवो के विकास के लिए सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं को 1.23 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए है उससे स्थानीय स्तर पर कोल्ड स्टोरेज बनाने के प्रावधान किए गए है। जिससे गन्ना से तैयार होने वाले ज्यूस और अन्य उत्पादों के अलावा अन्य कृषि उत्पादों को प्रसंस्कृत किया जा सके और बाजार में बिक्री के लिए भेजा जा सके। इसी तरह कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए 1,232.94 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे गन्ना प्रसंस्करण और चीनी उद्योग के अलावा अन्य औद्योगिक इकाइयाँ लगाने में मदद मिलेगी। डॉं मल्होत्रा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच गन्ने की कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों की आज जरूरत है। इन सभी की पूर्ति के साथ कृषि के समग्र विकास के लिए बजट में कृषि शोध आधारित 8,362.58 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है। सरकार द्वारा ’किसान रेल’ चलाने के प्रावधान करने के अलावा ’कृषि उड़ान’ की शुरुआत एक अच्छी पहल है इससे एक ओर जहां गन्ना और चीनी उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा वहीं खेती और किसानी से जुडे अन्य कृषि व्यापार और कारोबार को बढ़ावा भी मिलेगा। मल्होत्रा ने कहा कि बजट में सोलर पंप के लिए 20 लाख किसानों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता से गन्ना किसानोें को सिंचाई में जहां मदद मिलेगी वहीं सौर ऊर्जा के विकल्प खुलने से चीनी मिलों सो मंहगी होती बिजली से निजात भी मिलेगी।

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