केंद्र सरकार ने सॉफ्ट लोन की समय सीमा बढाई

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नई दिल्ली : चीनीमंडी – बकाया भुगतान से परेशान गन्ना किसानों को शीघ्र भुगतान करने में मदद के लिए सरकार चीनी मिलों के बचाव में आई है। खबरों की माने तो, 2018-19 के चीनी सीजन (अक्टूबर-सितंबर) में गन्ना किसानों का बकाया भुगतान करने के लिए सरकार ने चीनी मिलों के लिए सॉफ्ट लोन की समय सीमा बढ़ा दी है। सॉफ्ट लोन स्वीकृत करने की अंतिम तिथि को 31 मई से बढ़ा दिया गया है, और ऋणों के वितरण की अंतिम तिथि दो महीने बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई है।

डीएफएस को बैंकों को निर्देश जारी करने का आदेश….
वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) को इस संबंध में बैंकों को उपयुक्त निर्देश जारी करने का निर्देश दिया गया है। 28 फरवरी को कैबिनेट ने व्यथित चीनी मिलों के लिए सॉफ्ट लोन योजना को मंजूरी दी, ताकि वे गन्ना किसानों का बकाया समय पर चुका सकें। योजना के तहत, एक वर्ष के लिए अनुमानित 10,500 करोड़ रुपये के सॉफ्ट लोन चीनी उद्योग के लिए प्रदान किये गए, जिसमें सरकार कुल ब्याज बोझ का 7% वहन करेगी। इससे प्रभावी रूप से अधिकांश लाभार्थियों के लिए ऐसे ऋणों पर ब्याज दर 5% तक कम हो गई। चीनी उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि, इस योजना के तहत लगभग 160 मिलों ने लगभग 3000-3,500 करोड़ रुपये का ऋण लिया है। कैबिनेट ने यह भी निर्देश दिया कि स्वीकृत सॉफ्ट लोन केवल उन्हीं इकाइयों को प्रदान किया जाएगा, जिन्होंने चीनी सीजन 2018-19 में अपने बकाया बकाये का कम से कम 25% पहले ही चूका दिए है।

मिल मालिकों को राहत और गन्ना किसानों को फायदा…
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन ने दावा किया है कि, इस कदम से मिल मालिकों को “जबरदस्त राहत” मिलेगी और अंततः गन्ना किसानों को “फायदा” होगा। “योजना इस वर्ष मार्च में अधिसूचित की गई थी। कंपनियों को दस्तावेज तैयार करने और ऋण के लिए आवेदन करने में समय लगा। 31 मई की समय सीमा तक कुल 10,500 करोड़ रुपये में से केवल 3,000 करोड़ रुपये से 3,500 करोड़ रुपये ही स्वीकृत किए जा सके। इसलिए, सरकार ने इस तरह के ऋण आवेदनों की समय सीमा बढ़ा दी है जो प्रक्रिया में अटके हुए हैं। प्रारंभिक सरकारी आदेश के अनुसार, केवल ऐसे ऋण योजना के तहत पात्र थे जिन्हें 31 मई, 2019 तक ऋण बैंकों द्वारा स्वीकृत और वितरित किया गया था। समयसीमा का विस्तार चीनी उद्योग के लिए एक बड़ी राहत है, जो भारी अधिशेष के कारण तीव्र तरलता की कमी का सामना कर रहा है, और इसलिए, गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान करने में असमर्थ है।

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