कीमतों में उतार-चढ़ाव और ब्राजील का रिकॉर्ड चीनी उत्पादन के कारण निर्यातकों के सामने चुनौती.

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नई दिल्ली : वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सतर्क विदेशी व्यापारियों और ब्राजील में रिकॉर्ड उत्पादन ने भारतीय मिलों के चीनी निर्यात की योजना के सामने चिंता पैदा कर दी है।सफेद चीनी की तुलना में विश्व बाजार में कच्ची चीनी की अच्छी मांग है। कच्ची और सफेद चीनी की कीमतें लगभग 2,700 रुपये प्रति क्विंटल हैं। चीनी व्यापारी अशोक घोरपड़े ने कहा कि, मिलों को बिना किसी देरी के निर्यात बढ़ाना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि चूंकि आंतरराष्ट्रीय बाजार में दरों में उतार-चढ़ाव हो रहा है, इसलिए व्यापारी सौदे पर हस्ताक्षर करते समय बहुत सतर्क रहते हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि निर्यात में देरी करने वाली मिलों को भविष्य में अधिक नुकसान होगा। इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, चीनी मिलों के पास मार्च-अप्रैल 2021 तक चीनी को अनुबंधित और निर्यात करने का अवसर है। उसके बाद ब्राजील की चीनी बाजार में आने की संभावना है, क्योंकि अप्रैल 2021 तक ब्राजील का चीनी उत्पादन का रिकॉर्ड 38 मिलियन टन से अधिक होने का अनुमान है। परिणामस्वरूप, ISMA के अनुसार, भारतीय मिलरों के लिए वैश्विक बाजारों में चीनी की कीमतें भविष्य में अच्छी नहीं रहेंगी।केंद्र सरकार ने 2020-21 के लिए चीनी मिलों को 3,500 करोड़ की सब्सिडी को मंजूरी दी, ताकि मिलें 60 लाख टन चीनी का निर्यात कर सके।

वित्तीय संकट…

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) ने कहा है कि, मांग में कमी के कारण निजी चीनी मिलें अपने स्टॉक को 3,100 रुपयें प्रति क्विंटल न्यूनतम बिक्री मूल्य से भी नीचे बेच रही हैं।जिसके कारण मिलों को प्रति किलोग्राम 7 रूपयें का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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