चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति में किया जा रहा है सुधार: केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी

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नई दिल्ली, 28 सितम्बर: केन्द्र सरकार देश में कृषि से जुड़े पुराने उद्योगों को को पुनर्जीवित कर ग्रामीण उद्यमशीलता को बढ़ावा देने का काम कर ही है। इसके लिए आज़ादी से पूर्व और स्वंत्रता के बाद स्थापित किये गये कृषि आधारित उद्योगों को फिर से पुर्नजीवित कर वहाँ स्थानीय स्तर पर रोजगार के संसाधन बढाने पर कार्य किये जा रहे है। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश की 65 फ़ीसदी आबादी 35 साल या उससे कम उम्र के युवाओं की है। इसी युवा शक्ति के हाथ में काम देने के लिए सरकार ने रोजगार सृजन के नए अवसर तलाशने के साथ पुराने कृषि उद्योगों को पुर्नसंगठित करने की योजना बनायी है। इसके लिए राज्यों से संवाद के स्तर पर चीनी मिलों की क़ार्य दक्षता में इज़ाफ़ा किया जा रहा है। इसके लिए वित्तीय प्रबंधन कर चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति में सुधार किया जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि इसके लिये राज्यों के साथ समन्वित बैठक कर प्रदेश की पुरानी चीनी मिलों को रोजगारोन्मुख बनाने के लिये डीपीआर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए है। मंत्री ने कहा कि जिन इलाक़ों में पुरानी चीनी मिले है और वो वित्तीय कमी के कारण बंद है या बंद होने के कगार पर है उनसे वहाँ की ग्राउंड रिपोर्ट ली जा रही है। सरकार का मक़सद है कि चीनी मिल से प्रत्यक्ष और अप्रत्यण रूप से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बेरोज़गार न होना पड़े इसके लिए समाधान आधारित पर्याप्त विकल्प खोजे जा रहे है। कई राज्यों से रिपोर्ट आ रही है कि जहाँ पुरानी चीनी मिलें है वहाँ बारिश कम होने व अन्य कारणों से गन्ने की अनुपलब्धता की ख़बरें भी आ रही है। ऐसी चीनी मिलों को बंद होने से बचाने के लिए पड़ौसी जिले के किसानो से गन्ने की आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए किसानो को ट्रांसपोर्ट सुविधा देने या प्रति वाहन विशेष रियासत देने का काम किया जा सकता है। कुछ चीनी मिलें आर्थिक तंगी और वित्तीय नुक़सान को लेकर मिलो को बंद करने जैसी समस्याओं को लेकर चिन्तित है। हमारी सरकार इसके विकल्प के लिए चीनी मिलों को गन्ने से चीनी के साथ साथ इथेनॉल बनाने के लिये भी छूट दे रही है। चीनी मिलों में अनुपयोगी गन्ने का सीरा और वेस्टेज उत्पादों को इस काम मे लिया जा सकता है। इससे गन्ना किसानो को भी फ़ायदा होगा वही चीनी मिलों के लिए वित्तीय उपार्जन के नए माध्यम तैयार होंगे। मंत्री ने कहा कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित पिपराइच चीनी मिल में इसी योजना के तहत चीनी मिल कैम्पस में इथेनॉल प्लांट लगाया गया है। इससे चीनी मिल को फ़ायदा होगा तो स्थानीय स्तर पर गन्ना किैसानों के लिए भी सुगम अवसर बनेंगे।

मंत्री ने कहा कि मुझे ज्ञात हु्आ है कि यूपी के ही बस्ती जिले की मुंडेरवा चीनी मिल को भी इसी तरह से नए रुप में तकनीकी तौर पर अपग्रेड कर चालू किया गया है। इन मिलों के चलने और गन्ना किसानो को अपने गन्ने की आपूर्ति के लिये अन्य जिलों में नहीं जाना होगा वहीं स्थानीय युवाओं के लिये रोजगार को अवसर सृजित होंगे। केन्द्र सरकार की इस पहल पर प्रतिक्रिया देते हुए केन्द्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान मे कहा कि बस्ती की मुंडेरवा और पिराईच चीनी मिलों के ज़रिये भी हम रोज़गार के अवसर बढ़ा रहे है। मुंडेरवा का प्लांट 27 मेघावाट क्षमता का है जिससे तक़रीबन 9000 लोगों के लिए रोज़गार के रास्ते तैयार होंगे । इसी वजह से सरकार ने इस चीनी मिल की पुर्नचालू करने की लागत 438.87 करोड़ रुपये की है।

इसी तरह पिपराइच चीनी मिल की रिवाइंड लागत 659.96 करोड़ रुपये की है इससे क़रीब 30 हज़ार किसानों को फ़ायदा होगा और तक़रीबन 13 हज़ार लोगों को रोज़गार मिलेगा। मंत्री बालियान ने कहा कि ऐसी कई चीनी मिले और भी है जिनके कायाकल्प करने के लिए काम कर रही है। सरकार का मक़सद गाँवों में स्थानीय स्तर पर चल रहे रोजगार के इन माध्यमों को यथा संभव चालू रखने का है। अगर ये मिले चलती रहेगी तो स्थानीय लोगों के लिए काम के अवसर बने रहेंगे। सरकार की इस नीति से एक और गाँवों से लोगों का पलायन रुक रहा है वहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती भी मिल रही है।

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