आर्थिक अभाव के कारण चीनी मिल का काम प्रभावित न हो इसके लिए राजस्थान सरकार कर रही है पूरे प्रयास

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जयपुर,18 दिसम्बर: राजस्थान में वैसे तो सूती वस्त्र उद्योग काफी पुराना है लेकिन गन्ने से गुड और खांडसारी बनाने का काम भी सदियों पुराना है। गन्ने के उत्पादन के मामले में प्रदेश में ज्याादा क्षेत्र कवर नहीं होता है, लेकिन फिर भी आजादी से पूर्व यहां दो चीनी मिले कार्यरत रही है। यहां पर चित्तौडगढ़, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में गन्ना बहुतायत में होता है लेकिन आंशिक तौर पर बूंदी औऱ अन्य जिलों में भी गन्ने की खेती होती है। राजस्थान में वैसे तो तीन चीनी मिलें है। अगर चीनी मिलों का इतिहास देखा जाए तो आजादी से पहले से ही यहां चीनी मिलें चलती रही है। प्रदेश के कुल कृषि क्षेत्रफल का पचास फीसदी क्षेत्र यहाँ सिंचित है उसी क्षेत्र में चुनिंदा इलाकों में गन्ने की खेती होती है। यहाँ पर चीनी मिलों की स्थापना काफ़ी पहले से हो रखी है।

प्रदेश में चीनी मिलों से जुड़े रोज़गार के मामले में सूबे के सहकारिता मंत्री रमेश मीणा ने कहा कि वर्तमान में यहाँ एक सहकारी चीनी मिल है और दो नीजि क्षेत्र की मिलें है। इनमें से दो तो आज़ादी से पहले 1932 में चित्तौड़गढ़ और 1945 में श्रीगंगानगर में और एक आज़ादी के बाद 1965 में बूंदी में बनी। मंत्री ने कहा कि श्रीगंगानगर स्थित राजस्थान स्टेट गंगानगर चीनी मिल में अभी गन्ना पैराई सत्र चल रहा है। प्रदेश सरकार चीनी मिल को आर्थिक रूप से मज़बूत करने के लिए समय पर वित्तीय मदद देती रहती है। मशीनों के अपग्रेड के लिए भी वित्तीय मदद दी गयी है। पूँजी के अभाव में मिल का काम प्रभावित न हो इसके लिए पूरे प्रयास किए गए है। स्थानीय नागरिकों को रोज़गार मिले इसके लिए कुशल और अकुशल श्रमिकों की समय समय पर भर्ती निकाली जाती रहती है। चीनी मिल में गन्ना लेकर आने वाले किसानों के लिए भी यहाँ समुचित व्यवस्था है ।

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