इथेनॉल उत्पादन के लिए ‘उन’ सहकारी चीनी मिलों को स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जरूरत नहीं होगी…

महाराष्ट्र के चीनी आयुक्त ने मिलों को लिखी चिठ्ठी; इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने की कोशिशे हुई तेज

मुंबई : चीनी मंडी

गन्ना किसानों को जो बार बार मुसीबतों को झेलना पड़ता है, उससे बाहर निकालने का स्थाई समाधान निकलने के लिए केंद्र सरकार द्वारा इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। महाराष्ट्र के चीनी आयुक्त ने राज्य की चीनी मिलों को चिठ्ठी लिखकर साफ कर दिया है की, जिन सहकारी चीनी मिलों को केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय द्वारा इथेनॉल उत्पादन के लिए दिए गये कर्ज के ब्याज अनुदान के लिए पात्र सहकारी चीनी मिलों को इथेनॉल उत्पादन स्वास्थ्य प्रमाण पत्र लेने की जरूरत नहीं होगी।

2030 तक 20 प्रतिशत इथेनॉल का पेट्रोल में मिश्रन का टार्गेट

राज्य की सहकारी चीनी मिलों के आधुनिकीकरण, उर्जा परियोजना और अन्य कई सारी परियोजनाओं के विकास के प्रस्ताव चीनी आयुक्त कार्यालय को प्राप्त होते है । केंद्र सरकार ने इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ‘बायो फ्यूएल पॉलिसी’ लागू की है । इसके तहत 2020 तक 10 और 2030 तक 20 प्रतिशत इथेनॉल का पेट्रोल में मिश्रन का टार्गेट सरकार ने तय किया है । उसके लिए डिस्टलरी के आधुनिकीकरण 20 करोड़ और नई डिस्टलरी स्थापित करने के लिए ८० करोड़ रूपये 5 साल के लिए सरकार द्ववारा 6 % के दर से कर्जा मुहैय्या कराया जाएगा । जो सहकारी चीनी मिलें केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय द्वारा इथेनॉल उत्पादन के लिए दिए गये कर्ज के ब्याज अनुदान के लिए पात्र है, उन्हें इथेनॉल उत्पादन स्वास्थ्य प्रमाण पत्र लेने की जरूरत नहीं है। वो चीनी मिलें चीनी आयुक्त कार्यालय में केवल डी.पी. आर. प्रस्ताव दाखिल करके लाइसेंस प्राप्त कर सकते है ।

2017-18 में 141 करोड़ लीटर इथेनॉल उत्पादन

केंद्र के प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2017-18 में अनुमानित 141 करोड़ लीटर इथेनोल का उत्पादन किया गया, इससे तेल आयात के लिए खर्च होनेवाले करीब 4,000 करोड़ रुपये बचाए है। चार साल में 450 करोड़ लीटर का लक्ष्य रखा गया है, इससे तेल के आयात पर खर्च होनेवाले 12,000 करोड़ रुपये बचाए जाएंगे। 2017-18 में कच्चे तेल के आयात पर भारत ने लगभग 88 बिलियन अमरीकी डालर (करीब 5.9 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए। हमारा लक्ष्य पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण को 2022 तक 10 प्रतिशत और 2030 तक 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का है। वर्तमान में, पेट्रोल में इथेनॉल का 3.8 प्रतिशत होता है। जैव-रिफाइनरियां स्थापित होने से उसमे लगभग 1.5 लाख नौकरियां पैदा होने का दावा किया जा रहा है ।

सरकारद्वारा इथेनॉल उत्पादन को प्रोत्साहन

सरकार इथेनॉल के उत्पादन को “प्रोत्साहित” करना चाहती है, ताकि चीनी का उत्पादन कम हो सके। देश में उत्पादित चीनी की मात्रा अधिशेष की ओर अग्रसर है। आवश्यक मात्रा में चीनी के उत्पादन को कम करने के लिए, सरकार ने इथेनॉल के लिए “तीन प्रगतिशील” दरों की घोषणा की है। बी ग्रेड गुड़ (मोलासिस) से उत्पन्न इथेनॉल के लिए, प्रत्येक लीटर के लिए कीमत 47.49 रुपये से बढ़ाकर 52.43 रुपये और 100 प्रतिशत गन्ने के रस से उत्पादित इथेनॉल के लिए पूर्व-मिल मूल्य प्रति लीटर 59.19 रूपये दिया जायेगा। हालांकि, सी ग्रेड गुड़ से उत्पादित इथेनॉल की कीमत 43.70 रुपये प्रति लीटर की तुलना में 43.46 रुपये प्रति लीटर होगी।

नई दरें 1 दिसंबर 2018 से 30 नवंबर 2019 तक लागू

इथेनॉल की नई दरें 1 दिसंबर 2018 से 30 नवंबर, 2019 तक 2018- 2019 चीनी मौसम और इथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए प्रभावी होंगी। बाद में जारी एक बयान में सरकार ने कहा कि, इथेनॉल उत्पादन करते समय समय…1) 100 सेंट गन्ना का रस, 2) बी भारी गुड़िया / आंशिक गन्ना का रस, 3) सी भारी गुड़ और 4) क्षतिग्रस्त खाद्य अनाज / अन्य स्रोत, उस क्रम में आगे प्राथमिकता दें । देश में अतिरिक्त चीनी को कम करने और चीनी मिलों के साथ तरलता में वृद्धि के अलावा बयान में कहा गया है कि, गन्ना किसान की देनदारी से निपटने से इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के लिए उच्च इथेनॉल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

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