पिछले कुछ वर्षों में गन्ने के मूल्य में वृद्धि क्यों नहीं की गई: विपक्षी दलों का योगी सरकार को सवाल

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दलों ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर राज्य के गन्ना किसानों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है। राज्य में गन्ना किसानों की दयनीय हालत के मुद्दे पर गन्ना मंत्री के बयान से नाराज़ तीन प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने सदन से वॉकआउट किया और सरकार से पूछा कि पिछले कुछ वर्षों में गन्ने के मूल्य में वृद्धि क्यों नहीं की गई।

इस पर सरकार से स्पष्टीकरण देने की मांग करते हुए विपक्षी दलों ने कहा कि राज्य सरकार ने गन्ना किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, जिस पर किसानों ने भरोसा किया, लेकिन सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं करके राज्य के गन्ना किसानों के साथ विश्वासघात किया है।

बता दें कि तीन मुख्य विपक्षी दलों सपा, बसपा और कांग्रेस के सदस्यों ने गन्ना मंत्री सुरेश राणा के बयान पर आपत्ति जताते हुए उस समय सदन से वॉकआउट किया जब मंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में राज्य की 29 चीनी मिलें बंद हुईं और भाजपा के सत्ता में आने के बाद सरकार ने गन्ना खेती को प्रोत्साहन देने के लिए कई कदम उठाए। मंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2017 में राज्य में 20 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती थी जो अब बढ़कर 28 लाख हेक्टेयर हो गया है।

मंत्री के दावे को ग़लत बताते हुए सपा एमएलसी शशांक सिंह ने कहा कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद गन्ने की खेती का रकबा 10-12% कम हो गया है। किसानों को परची जारी करने के समय को दोगुना करके 12-15 दिन कर दिया गया जबकि इसके लिए 240 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा तय कर दी गई है।

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