आर्थिक लाभ पाने के लिए चीनी मिलों को अन्य विकल्पों पर ध्यान देने की जरुरत

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नई दिल्ली, 2 जनवरी: गन्ना पैराई सत्र को लेकर देशभर की चीनी मिलों में कार्य प्रगति पर है। पैराई के दौरान चीनी मिलों के सामने आ रही गन्ना भुगतान की समस्याएँ अक्सर मीडिया की सुर्ख़ियाँ बनी रहती है। समय पर गन्ना किसानों को उनका गन्ना बकाया का भुगतान हो और चीनी मिलों को भी आर्थिक हानि न हो इसके लिए सरकार जहां चीनी मिलों के वित्तीय समायोजन पर ध्यान दे रही है वहीं विशेषज्ञ भी चीनी मिलों को वित्तीय उपार्जन के लिए अतिरिक्त आय के श्रोत तैयार करने की सलाह दे रहे हैं। राजधानी दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के चेयरमैन विजय पॉल शर्मा ने कहा कि चीनी मिलें और गन्ना किसान ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण धुरी है जो ग्रामीण भारत की तरक़्क़ी का महत्वपूर्ण आर्थिक आधार है। इन दोनों निकायों के सुचारु चलने के लिए ज़रूरी है कि चीनी मिलों का आर्थिक ढाँचा पूरी तरह मज़बूत हो और समय पर गन्ना किसानों को उनका बकाया मिले। अगर ऐसा समयानुकूल होगा तो किसानों को ज़रूरत के वक्त वित्तीय ज़रूरतों को पूरा करने के लिए आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा साथ ही अगली फसल के लिए खाद, बीज और अन्य ज़रूरतों की पूर्ति करने की दिक्कत नहीं होगी।

शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ समय से देखने में आ रहा है कि चीनी मिलें आर्थिक तंगी के चलते गन्ना किसानों का बकाया चुकाने में असमर्थ रही है जिससे कई सारी दिक़्क़तें सामने आ रही है।

इस तरह की समस्याओं के निदान के साथ चीनी मिलों की आर्थिकी परिस्थिति बढ़ाने के लिए हमें दीर्घकालिक योजनाओं पर काम करने की ज़रूरत है। आज ज़रूरत इस बात की है कि चीनी मिलें अपनी आमदनी के बढ़ाने के साथ सरप्लस मनी बैलेंस रखने और जमा पूँजी की हर समय उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चीनी के उत्पादन व प्रसंस्करण के अलावा इससे जुड़े अन्य विकल्पों पर ध्यान दे ताकि चीनी के कारोबार और विविधिकरण को बढ़ावा दिया जा सके।

शर्मा ने कहा कि गन्ने के अवशेष का उपयोग कर के बिजली बनायी जा सकती है, बायोगैस बनायी जा सकती है, कम्पोष्ट खाद बनायी जा सकती है। इसी तरह से और भी कई विकल्प हैं जो चीनी मिलों को अतिरिक्त आय अर्जित करने के लिए सह उद्योग का काम कर सकते हैं। इन सभी धन्धों से चीनी मिलों को अपनी घरेलू ज़रूरतों को पूरा करने में जहां मदद मिल सकती है वहीं शेष बचे उत्पाद को बेचने से अतिरिक्त आय भी हो सकती है, जो उनके लिए ज़रूरत के वक्त वित्त पोषण का बड़ा ज़रिया बनकर भविष्य की आमदनी का स्थायी श्रोत बन सकती है। विजय पॉल शर्मा ने कहा कि चीनी मिलें अगर इस तरह के नव प्रयोगों को व्यवहारिकता में लाती है तो उन्हें करोड़ों रूपयों की अतिरिक्त आय अर्जित होगी। आज जिस तरह से चीनी मिलें सरकारों से वित्तीय मदद और सॉफ़्ट लोन की उम्मीद कर रही है अगर ये सब विकल्प अपनाये जाते वो सब इन्हें नहीं करना पड़ता। इस तरह की पहल से चीनी मिलें तो सुदृढ़ होगीं ही गन्ना किसान भी मज़बूत होंगे।

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