अधिशेष से निपटने के लिए चीनी मिलें उत्पादित करेंगी निर्यात अनुकूल परिष्कृत चीनी

मुंबई : चीनी मंडी

अधिशेष चीनी की समस्या से लढ़ रहे चीनी मिलों के सामने इस साल भी बम्पर उत्पादन का संकट मंडरा रहा है । पिछले साल महाराष्ट्र चीनी की आपूर्ति 44 मिलियन टन के अभूतपूर्व स्तर तक पहुंची थी और इस साल फिर उच्च चीनी उत्पादन की उम्मीद है। रिकॉर्ड स्तर पर चीनी उत्पादन और घरेलू और विश्व बाजार में सीमित मांग के चलते चीनी उद्योग के पतन के खतरे के बारे में बात की जा रही है। इसके चलते मिलों को विश्व स्तर पर स्वीकृत उच्च गुणवत्ता वाली परिष्कृत चीनी के उत्पादन को बढ़ाकर अधिशेष समस्या से निपटाने का सबसे आशाजनक तरीका माना जा रहा है।

दुनिया का शीर्ष चीनी उत्पादक ब्राजील ने इस साल चीनी उत्पादन को कम करने का फैसला किया है। ब्राजील का यह निर्णय भारतीय उद्योग को विश्व बाजार में अपनी चीनी खपत का अवसर प्रदान करने की उम्मीद है। पिछले सीजन से भारत में 10.5 लाख मेट्रिक टन का अधिशेष (उद्घाटन स्टॉक) है और अक्टूबर से शुरू होने वाले 2018-19 में 33.5 लाख मेट्रिक टन चीनी उत्पादन करने की उम्मीद है। इसलिए इस साल चीनी की कुल उपलब्धता 26 मिलियन टन की घरेलू खपत के मुकाबले लगभग 44 मिलियन टन होगी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अभी चीनी के दाम 37 रुपये प्रति किलो है, जो एक साल पहले 40-43 रुपये के आसपास थे ।

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