चीनी मिलों के लिए कठिन समय

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नई दिल्ली : चीनी मंडी

लॉकडाउन के कारण कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम और मिठाई की दुकानों के बंद होने के कारण चीनी की डिमांड घट गई है। डिमांड घटने के चलते चीनी मिलें चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही हैं। लॉकडाउन के कारण मोलासिस, स्पिरिट और एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहोल (ENA) जैसे चीनी के उपोत्पादों की मांग भी ठप हो गई है। पेपर मिलों के शटडाउन ने बगास की मांग को कम कर दिया है। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने भी पेट्रोल के साथ मिश्रित होने के लिए इथेनॉल की मांग कम कर दी है। तेल विपणन कंपनियों ने कहा की, लॉकडाउन अवधि के दौरान पेट्रोल पंप बंद रहे, जिसके परिणामस्वरूप ईंधन की कम खपत हुई है।

चीनी और उपोत्पाद दोनों के मांग में गिरावट के कारण मिलें चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रही हैं। महाराष्ट्र की चीनी मिलें उत्तर प्रदेश की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं। महाराष्ट्र में गन्ना उत्पादन में गिरावट के परिणामस्वरूप मिलों के सामने चीनी और उपोत्पाद दोनों की अधिशेष की समस्या कम हैं, क्यूंकि उत्तर प्रदेश के मुकाबले इनवेंटरी कम है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश की मिलें गन्ने की बंपर पैदावार के कारण चीनी और बायप्रोडक्ट उत्पादों के प्रबंधन के लिए संघर्ष कर रही हैं।

चीनी उद्योग की कठिनाइयाँ को देखते हुए, चीनी मिलों के संगठनो ने प्रधामंत्री को भी पत्र लिख कर सहायता करने की मांग की है।

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