पद्मश्री विठ्ठलराव विखे पाटील चीनी मिल की समस्या बढ़ी…

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औरंगाबाद: चीनी मंडी

पद्मश्री विठ्ठलराव विखे पाटील चीनी मिल द्वारा लिए गये लोन के मामले में मुंबई हाईकोर्ट के औरंगाबाद बेंच को जांच रिपोर्ट न सौंपने पर बेंच ने लोनी के पोलिस इंस्पेक्टर पर नाराजगी जताई। सरकारी वकील ने यह दलील दी की, इस मामले की जांच पुलिस उपाधीक्षक द्वारा की जाएगी। वकील की इस दलील पर, न्यायमूर्ति टी.व्ही. नलावडे और आर.जी. अवचट ने निर्देश दिया की, संबधित अधिकारी को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए, अगर कोई सबूत मिलता है, तो अपराध दर्ज करना चाहिए और संबधित रिपोर्ट 14 नवम्बर को बेंच को सौपनी होगी।

क्या है मामला?

गन्ना किसानों को आधारभूत खुराक (बेसल डोस) देने के लिए विखे-पाटिल चीनी मिल ने 2004 में यूनियन बैंक से 2.5 करोंड और बैंक ऑफ़ इंडिया से 4.65 करोड़ रुपयों का लोन लिया था। उपरोक्त बैंकों को 2009 तक क्रमशः 3.26 करोड़ और 5.87 करोंड रूपये लौटाने थे। 2009 में राज्य सरकार ने किसानों के लिए कर्जमाफी की घोषणा की, इन बैंको ने कर्जमाफी का प्रस्ताव तैयार किया, और सरकार ने कर्ज माफ़ कर दिया। इस बीच, ऑडिट में पाया गया की, कर्ज दिए गये गन्ना किसानों की सूचि, कर्ज का विवरण और उन्हें आवंटित किये गये चेक की कोई भी जानकारी बैंक के पास नही थी। चूंकि वह लोन माफ़ी योजना का लाभ उठाने के लिए योग्य नही था, इसलिए सरकार ने पैसे वापस मांगे थे। मिल ने 2013 में 9 करोंड रूपये बैंक लोन ब्याज के साथ चुकाए। तत्कालीन सहकारिता मंत्री को 193 सहकारी चीनी मिलों की शिकायते मिली थी। सहकारी विभाग की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बैंकों या संस्थानों को सरकार को ऋण लौटाने वालों के खिलाफ कोई आपराधिक या अन्य कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। इसी कारण विखे-पाटिल मिल के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नही की गई।

याचिकाकर्ता दादासाहेब पवार और मिल के सदस्य बालासाहेब विखे सुचना के पक्ष में जानकारी मांगी थी। मिल ने किसानों के नाम पर कर्ज लिया था और उस कर्ज को कभी भी किसानों को नही दिया था, ऐसा आरोप है। पुलिस ने शिकायतकर्ताओं को थाने बुलाया, उनकी फ़रियाद को सुना ; लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, ऐसा कहा गया है।

याचिकाकर्ताओं की तरफ से ऍड. प्रज्ञा तळेकर और ऍड. अजिंक्‍य काळे काम देख रहें है, और सरकार की तरफ से मुख्य सरकारी वकील अमरजितसिंह गिरासे काम देख रहे है।

चीनी मिल ने अपनी ऋण माफी योजना के तहत सदस्यों को धोखा दिया है, इसलिए याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया है कि मिल के निदेशक मंडल और मालिक पर गुन्हा दर्ज करनी चाहिए।

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