गन्ना मूल्य पर अनिश्चितता: चीनी मिलों पर फुट सकता है गन्ना किसानों का आक्रोश

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चंडीगढ़: राज्य के सभी सहकारी और निजी चीनी मिलों में गन्ने की पेराई शुरू हुए एक सप्ताह से अधिक समय हो गया है, लेकिन हरियाणा सरकार को अभी भी गन्ने की फसल के लिए स्टेट एडवाइजरी प्राइस (SAP) यानी गन्ना मूल्य की घोषणा करनी बाकी है।

सरकार ने SAP की घोषणा के लिए कोई तारीख तय नहीं की है। किसान को डर है कि SAP की घोषणा में देरी उन्हें महंगी पड़ सकती है, क्योंकि इससे चीनी मिलों के संवितरण में भी देरी होगी। किसान यूनियन के नेताओं ने सरकार पर उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और चेताया कि यदि उनकी समस्याओं को हल नहीं किया गया तो वे राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे।

करनाल के एक पीड़ित किसान देशराज कौशिक ने कहा कि सरकार द्वारा SAP तय नहीं करने से चीनी मिलें उनके गन्ने को ले तो रही हैं लेकिन उसकी कोई कीमत नहीं लिखी जा रही है। इससे हमें आगे काफी परेशानी होगी।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के हरियाणा अध्यक्ष रतन मान ने कहा कि सरकार के पास SAP की घोषणा करने के लिए समय नहीं है। यह साबित करता है कि सरकार के पास किसानों के लिए समय नहीं है। भाकियू ने रविवार को कुरुक्षेत्र में किसानों की एक बैठक बुलाई और सरकार द्वारा अगले हफ्ते तक गन्ने का SAP प्रति क्विंटल 50 रुपए नहीं बढ़ाने पर राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करने का एलान किया है।

इस संबंध में, यमुनानगर जिले के नाराज गन्ना किसानों ने भारतीय किसान संघ के बैनर तले रादौर में महापंचायत की। उन्होंने राज्य के सभी चीनी मिलों को बंद करने और सभी विधायकों के आवास पर गन्ना जलाने की धमकी दी थी यदि सरकार 10 दिसंबर तक गन्ने का एसएपी Rs 370 प्रति क्विंटल नहीं करती है। गौरतलब है कि गन्ना नियंत्रण बोर्ड की 13 नवंबर को बैठक हुई थी, लेकिन SAP के बारे में उसमें कोई निर्णय नहीं लिया गया। हरियाणा कृषि विभाग के अतिरिक्त गन्ना आयुक्त जगदीप सिंह बराड़ ने कहा कि SAP पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इस तरह के फैसले मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री लेते हैं।

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