उत्तर प्रदेश सरकार एथनॉल प्लांट के जरिये युवाओं के लिए पैदा करेगी रोजगार

गोरखपुर, 20 सितम्बर: केन्द्र सरकार देश में खेती को बहुपयोगी बनाने के लिए कृषि उत्पादों के शेष बचे अवशेषों का सदुपयोग करने के लिए नवाचारो को प्रौत्साहित कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह नगर गोरखपुर में बायोफ्यूल कॉम्पलेक्स शुरु किया जा रहा है। इस एथनॉल व कम्प्रेस्ड बायो गैस प्लांट में गन्ना केअवशेष के अलावा धान औऱ अन्य कृषि उत्पादों के भूसे को उपयोग में लाया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि किसानों को गन्ने के अवशेषो का भी मूल्य मिले और स्थानीय नागरिकों को रोजगार, इसी को ध्यान में रखकर यहाँ एथनॉल प्लांट की शुरुआत की जा रही है।

इस प्लाटं के लगने से भविष्य में गोरखपर में क्या बदलाव आएगा, गन्ना किसानों को कितना फायदा होगा इस बारे में गोरखपुर से सांसद रवि किशन से बात की गयी तो उनका कहना था कि गोरखपुर संभाग में गन्ने की खेती काफी तादाद में होती है। हर साल गन्ना किसानों का मुद्दा यहां चर्चा में रहता है। गन्ना बकाया को लेकर किसान परेशान रहते है। सरकार ने गन्ना किसानों को सौगात देने के लिए यहाँ मिल शुरु करने की पहल की। साथ ही किसानों को उनके गन्ना के वाजिब दाम दिलाने के लिये जहाँ चीनी मिल है वहीं गन्ने के अवशेष को भी उपयोगी बनाकर किसान को वाजिब दाम और युवाओं को काम दिलाने के लिए एथनॉल प्लांट लगाया जा रहा है। सांसद ने कहा कि ये एरिया मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र है, यहाँ के गन्ना किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यहाँ चीनी मिल कैम्पस में देश का पहला टूजी एथनॉल प्लांट लगाने का निर्णय लिया है। गन्ना किसानों व क्षेत्र की जनता के लिए सरकार की ओर से ये बड़ी सौग़ात है। सांसद ने कहा कि तत्कालीन सरकारों ने गन्ना किसानों को न उनके उत्पाद का वाजिब दाम दिलाया और न ही चीनी मिलों को वित्तीय मदद दी। हमारी सरकार जो कहती है वहीं करती है। गोरखपुर की धुरियापार चीनी मिल में लग रहा ये बायो फ्यूल प्लांट 1050 करोड़ रुपयों की लागत से तैयार होगा जिसके लिए केन्द्र सरकार मदद दे रही है। इसका निर्माण इंडियन ऑयल कम्पनी की देखरेख में हो रहा है। इंडियन ऑयल संभाग प्रबंधक अभ्युदय शाही ने कहा कि धुरियापार में करीब 50 एकड़ जमीन पर 1050 करोड़ की लागत से बॉयोफ्यूल कांप्लेक्स तैयार होगा। इस प्लांट की क्षमता 20 मीट्रिक टन है। इस बायो फ़्यूल कॉम्पलेक्स के दो फ़ेज़ होंगे। एक चरण मे रोज़ाना कम्प्रेस्ड प्लांट में गन्ने के अवशेष और धान के भूसे के अलावा गोबर का अपशिंषेट डलेगा वहीं दूसरे चरण में द्वितीय जनरेशन एथनॉल प्लांट की स्थापना होगी। क़रीब 700 मिट्रिक टन प्रतिदिन फीड स्टॉक वाले एथनॉल प्लांट की लागत 900 करोड़ रूपये है। इसमें ख़ासतौर से गन्ने का तरल कचरा व गेहूँ व धान का भूसा डलेगा। इसकी उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 100 किलो लीटर होगी।

फ़ैज़ाबाद कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ जेएस संधु ने कहा कि सरकार ने यहाँ पर ऐथनॉल प्लांट लगाकर अच्छा किया है। इससे एक ओर जहाँ गन्ना क़िसानों को गन्ने के साथ-साथ गन्ने की भूसी और तरल अपशिष्ट का भी मूल्य मिलेगा वहीं हर साल हज़ारों युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर सामने आएँगे। संधु ने कहा कि चीनी मिलों में प्रसंस्कृत गन्ने के अपशिष्ट और शीरा पहले बेकार समझे जाते थे लेकिन अब चीनी मिल इसे एकत्रित कर इन्हें एथनॉल बनाने में काम ले लिया जाएगा। संधु ने कहा कि गन्ना किसानों के पशुओं के गोबर को भी प्लांट के प्रबंधन द्वारा ख़रीदा जाएगा, इससे भी किसानों को अतिरिक्त आमदनी होगी।

ग़ौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 18 सितम्बर को गोरखपुर चीनी मिल परिसर में इस एथनॉल प्लांट का शिलान्यास कर एक और जहाँ गन्ना किसानों से किया वादा पूरा कर दिया वहीं युवाओं के लिए रोज़गार का विकल्प तैयार कर बेरोज़गारी को मुद्दा बना रहे विपक्ष को चुप रहने पर मजबूर कर दिया।

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