उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों ने मांगा 1,000 करोड़ रुपये का बिजली बकाया

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश (उप्र) सरकार ने सिंभावली और मोदी समूह की एक-एक चीनी मिलों के खिलाफ बकाये के भुगतान में चूक (डिफॉल्ट) के लिए एफआईआऱ दर्ज कराई है। यूपी के गन्ना आयुक्त संजय भोसरेड्डी ने कहा कि यह एफआईआर आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसीए) 1955 की धारा 3/7 के तहत की गई है। गौरतलब है कि उप्र की चीनी मिलों को मुख्यमंत्री ने 31 अक्टूबर तक गन्ना किसानों के सारे बकाये के भुगतान अल्टीमेटम दिया है। उप्र की चीनी मिलें इसे भुगतान करने में आनाकानी करने लगी हैं, ऐसा आरोप किसान लगा रहे है।

उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार से स्टेट पावर युटिलिटी के तकरीबन 1000 करोड़ रुपए के आरंभिक निपटान की राशि का भुगतान करने को कहा है। उनका कहना है कि ये भुगतान आने पर ही वे गन्ना किसानों के गन्ना बकाया को कम कर सकेंगे। चीनी उत्पादन के आलावा उत्तर प्रदेश की कुछ निजी मिलर्स बिजली का भी उत्पादन करते हैं। इनमें से वे कुछ अपने उपभोग के लिए रखते हैं और बाकी पेराई सत्र के दौरान तय टैरिफ पर यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) को बेच देते हैं। चीनी मिलें यूपीपीसीएल से अपने 1000 करोड़ रुपए का पिछले 2018-19 के पेराई सत्र का बकाया मांग रही है। चीनी मिल के एक प्रबंधक ने कहा कि हम अपने बिजली के बकाये के भुगतान के लिए राज्य के अधिकारियों से सतत मांग कर रहे हैं लेकिन अभी तक इसपर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि इस पैसे के आने के बाद ही गन्ना किसानों के भुगतान कर पाएंगे।

उधर, उत्तर प्रदेश के गन्ना आयुक्त भोसरेड्डी ने कहा कि किसानों के बकाये के भुगतान में देरी करनी वाली दूसरी चीनी मिलों के सुस्त रवैये के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। इसकी पूरी स्थिति का आकलन हम दैनिक आधार पर कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के अल्टीमेटम का पालन करते हुए वैसे तो कई चीनी मिलों ने किसानों के बकाए का 80 प्रतिशत तक भुगतान कर दिया है।

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