उत्तर प्रदेश: Escrow अकाउंट गन्ना किसानों के लिए साबित हो रहा है फायदेमंद

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए एस्क्रो (Escrow) अकाउंट वरदान साबित हो रहा है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के सत्ता में आने के तुरंत बाद, इसने मिलों के लिए एस्क्रो खाते खोलना अनिवार्य कर दिया, जो किसानों की सुरक्षा, उनकी आय बढ़ाने और प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए वरदान साबित हुए हैं।

नियमानुसार चीनी मिल द्वारा खाते में प्राप्त 85 प्रतिशत धनराशि किसानों की बकाया राशि के भुगतान के लिए निर्धारित की जाती है। इस खाते से किसानों को भुगतान के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए धन के डायवर्जन करनेवालों को गिरफ्तार किया जाता है। एस्क्रो खाते की इस नई व्यवस्था से चीनी मिलों द्वारा किसानों को भुगतान किए गए गन्ने के मूल्य की राशि प्राप्त करने में पारदर्शिता आई है। अब गन्ना मूल्य का लेखा जोखा मिल प्रतिनिधि एवं जिला गन्ना अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है। इससे पहले, मिलें अन्य उद्देश्यों के लिए पैसों का उपयोग करती थीं, लेकिन एस्क्रो खाता खुलवाने के बाद उसमें जमा किए गए पैसे का इस्तेमाल सीधे किसानों को गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए किया जाता है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने राज्य में गन्ना किसानों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। गन्ना किसानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने एक टोल फ्री नंबर 1800-121-3203 जारी किया है। अब गन्ना किसान टोल फ्री नंबर 1800-103-5823 पर सर्वे, सट्टा, कैलेण्डर, पर्ची आदि की समस्या को लेकर अपनी शिकायत दर्ज कराकर समाधान प्राप्त कर रहे हैं। प्राप्त 1,22,125 का समाधान किया जा चुका है।

कैसे काम करता है एस्क्रो खाता?

मिलों से चीनी खरीदने के बाद व्यापारियों को 85 प्रतिशत रकम एस्क्रो खातों में और शेष 15 प्रतिशत रकम चीनी मिलों के खाते में जमा करना होता है। बाद में चीनी मिलों को शीरा, खोई, इथेनॉल और सैनिटाइजर की बिक्री से प्राप्त धन भी एस्क्रो खातों में जमा किया जाता है। गन्ने के रस से सीधे इथेनॉल बनाने वाली ऐसी चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए उन मिलों में उत्पादित इथेनॉल के मूल्य का 55 प्रतिशत टैग किया है। मिलों द्वारा सैनिटाइजर के उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले इथेनॉल के बिक्री मूल्य का लगभग 65 प्रतिशत गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए भी टैग किया गया है, जिससे किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान की समस्या में कमी आयी है।

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